**केसला ब्लॉक के 32 गांवों की पानी की पीड़ा: तवा डैम के बावजूद सिंचाई के लिए तरसते किसान**
**हरदा (मध्य प्रदेश):** केसला ब्लॉक के 32 गांव आज भी पानी की भीषण समस्या से जूझ रहे हैं। यहाँ के आदिवासी किसान, जिनके पास 20 से 50 एकड़ तक खेत हैं, सिंचाई के अभाव में या तो मजदूरी करने को मजबूर हैं या अन्य राज्यों में पलायन कर रहे हैं। तवा डैम के निर्माण के बावजूद, जो स्वयं केसला ब्लॉक में स्थित है, इन गाँवों तक पानी नहीं पहुँच पाया है। जबकि इस डैम से हरदा जिले तक सिंचाई होती है, केसला के किसान सूखी नदियों में गड्ढे खोदकर पानी जुटाने को विवश हैं, जो नाकाफी है।
**3 साल से लंबित है देवरी सिंचाई परियोजना**
इन गाँवों के किसानों की उम्मीद “देवरी सिंचाई परियोजना” से जुड़ी है, जो पाइपलाइन के जरिए खेतों तक पानी पहुँचाएगी। यह परियोजना 3 साल से प्रस्तावित है, लेकिन अभी तक धरातल पर कोई प्रगति नहीं हुई। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें सिंचाई सुविधा मिल जाए, तो वे किसी भी अन्य सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं रहेंगे और स्वावलंबी बन जाएंगे।
**विरोधाभास: जल स्रोत के पास के गाँव, फिर भी प्यासे**
स्थानीय किसान रामगोपाल सिंह उइकेय कहते हैं, *”तवा डैम हमारे ब्लॉक में है, लेकिन हमारे खेत सूखे रहते हैं। हरदा तक पानी जाता है, पर हमारी फसलें मर रही हैं। सरकार को इस अन्याय को दूर करने के लिए तुरंत कोई योजना बनानी चाहिए।”*
**ग्रामीणों की अपील**
केसला के गरीब किसानों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि देवरी परियोजना को शीघ्र लागू किया जाए। उनका कहना है कि थोड़ी-सी जमीन होने के बावजूद पानी न मिलने से वे विकास से वंचित रह जाते हैं। अब वे सिर्फ एक सही खबर का इंतजार कर रहे हैं – वह दिन जब उनके खेतों में पानी पहुँचेगा और उनकी जिंदगी बदलेगी।
**नोट:** यह मामला कृषि संकट और जल असमानता की गंभीर तस्वीर पेश करता है। स्थानीय प्रशासन द्वारा इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। 
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