कमिश्नर साहब, कब तक चुप रहेंगे? जब जनता कचरे में डूब जाएगी या जब कोई मर जाएगा?”
जबलपुर |
नगर निगम की बेशर्मी का लाइव सबूत – जनता मर रही है, ड्राइवर मज़े में हैं!
जबलपुर नगर निगम की लापरवाही अब ‘खबर’ नहीं रही – ये अब एक अपराध बन चुकी है।
कमिश्नर के आदेश हवा हो चुके हैं। कचरा गाड़ियों के ड्राइवर खुलेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं, और नगर निगम के अधिकारी या तो सो रहे हैं, या इस गंदे खेल में हिस्सेदार हैं।
रानीताल मुक्तिधाम के सामने का ‘कचरा प्लांट’ – अब कचरा फेंकने की जगह नहीं, एक खुला ज़हर बन चुका है।
ड्राइवर नंबर प्लेट निकाल देते हैं – ताकि CCTV उन्हें पकड़ न पाए।
कैमरे लगे हैं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं – क्यों?
सीएसआई विष्णुकांत दुबे, संदीप जायसवाल, अभिनव मिश्रा, जोन 2 के सुपरवाइज़र – सब चुप क्यों हैं?
क्या सबकी जेबें गर्म हैं, इसलिए आंखें बंद हैं?
जनता सब देख रही है। अब सवाल नहीं, सीधा हिसाब माँग रही है।
बीमार पड़ रहे हैं बच्चे
बदबू में जी रहीहैं महिलाएं
बुजुर्ग दम घुटने से परेशान हैं
लेकिन नगर निगम का सिस्टम इतना ढीठ हो चुका है, कि उसे फर्क ही नहीं पड़ता।
नाली खुदवाकर दिखावा हुआ – और ड्राइवरों ने रास्ता निकाल लिया। गाड़ियाँ अब भी घुस रही हैं, कचरा गिरा रही हैं, और सिस्टम देख रहा है।
क्या कमिश्नर खुद जाकर देखेंगे मैदान की हालत? या AC दफ्तर में बैठकर ‘ऑल इज़ वेल’ की रिपोर्ट पढ़ते रहेंगे?
अब जनता का अल्टीमेटम है:
7 दिन के अंदर इस भ्रष्ट सिस्टम पर कार्रवाई कीजिए।
ड्राइवरों और अफसरों पर FIR दर्ज हो।
मैदान की सफाई हो।
और हर गाड़ी का GPS ट्रैकिंग चालू हो।
वरना अगली रिपोर्ट न्यूज़ चैनल में नहीं – जनता की कोर्ट में होगी। और फिर जवाब सिर्फ प्रेस नोट से नहीं चलेगा, जन आंदोलन से मिलेगा।
कमिश्नर साहब – अब बोलिए!
क्योंकि अब जनता चुप नहीं बैठेगी।














