नोहर || सहायक निदेशक कृषि (विस्तार), नोहर डॉ. रामप्रताप गोदारा के नेतृत्व में कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने गांव जसाना के अनेक चको व रामसरा क्षेत्र का भ्रमण किया गया ।

इस टीम में कृषि विज्ञान केंद्र नोहर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, डॉ. सुरेश चंद कांटवा, केवीके संगरिया के वैज्ञानिक डॉ. उमेश कुमार, केवीके, नोहर के शस्य वैज्ञानिक डॉ. अशोक चौधरी, कृषि अधिकारी डॉ. द्वारका प्रसाद द्वारा क्षेत्र भ्रमण के दौरान मूंग फसल के पुष्पीय भाग में थ्रिप्स तथा मारुका नामक नाशीकीट का प्रकोप देखा गया जिसके कारण फसल के पुष्पीये भाग में फलिया नहीं बन रही है तथा नाशी कीट मारुका द्वारा पुष्पीये भाग को आपस में जोड़कर गुच्छानुमा सरंचना बनाई जा रही है।
गुच्छेनुमा सरंचना के अंदर रहकर पुष्पीये भाग को नष्ट कर रहा है। इस नाशी कीट के कारण फसल उत्पादन में नुकसान की आशंका है। इसके उपचार हेतु क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. कीटनाशक 0 .5 मि.ली. अथवा इंडोक्साकार्ब 14.5 एस. सी. 0.75 मिलीलीटर अथवा फ्लुबेंडाइमाइड 480 एस.सी. 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी एवं एक ही रसायन का बार – बार छिड़काव न करें। इसके साथ ही मूंग में पत्ती धब्बा रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेन्डाजिम + मेंकोजेब 75 % का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सिफारिश की। तथा क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्वार की फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट का प्रकोप देखा गया इसके उपचार हेतु कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 2.5 ग्राम एवं स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी अथवा स्यूडोमोनास 5 मिलीलीटर एवं बैक्टरीनाशक 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी।
इस भ्रमण में सहायक कृषि अधिकारी फेफाना जसवंत सिंह सहु, महेंद्र राजेरा एवं कृषि पर्यवेक्षक जसाना रमेश सियाग ने बीटी नरमा में गुलाबी सुंडी की निगरानी एवं प्रबंधन के साथ – साथ संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी तथा हरे तेले के नियंत्रण हेतु फ्लोनिकामिड़ 50 % डब्ल्यू. जी. 0.5 ग्राम अथवा डाइनोटेफूराम 0.4 ग्राम प्रति लीटर की पानी की दर से छिड़काव करने की सिफारिश की।










