कभी बैठी थीं घर पर, अब चलाती हैं टैक्सी

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कभी बैठी थीं घर पर, अब चलाती हैं टैक्सी

– वीमेन विथ व्हील्स ट्रेनिंग प्रोग्राम ने बदली 70 से अधिक महिलाओं की जिंदगी
– कार ड्राइवर और टू व्हीलर राइडर का प्रशिक्षण लेने पर मिला सर्टिफिकेट

जयपुर 19 जुलाई। पढ़ाई को बीच में छोड़कर घर बैठ चुकी रजनी खारिया अब एक प्रशिक्षित ड्राइवर है। वो न केवल अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही है, बल्कि सम्मान से जीवन भी जी रही है। रजनी जैसी 70 से अधिक संसाधन विहीन महिलाओं का वीमेन विथ व्हील्स ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण लेकर जीवन बदल चुका है। शुक्रवार को इन सभी महिलाओं को एशियन डवलपमेंट बैंक, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) और आजाद फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान होटल ग्रांड उनियारा में प्रशिक्षण के सर्टिफिकेट वितरित किए गए। सभी ने अक्टूबर 2021 से जून 2024 के बीच कार ड्राइवर और टू व्हीलर राइडर के रूप में प्रशिक्षण लिया है।

वीमेन विथ व्हील्स प्रोग्राम में प्रशिक्षण पाने के बाद इन महिलाओं की जिंदगी में आमूलचूल परिवर्तन देखा जा सकता है। इनमें नए आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का संचार हुआ है। अब ये महिलाएं स्वयं पर होने वाली हिंसा का विरोध करने में समर्थ हो गई हैं। कई महिलाओं ने पुनः पढ़ाई प्रारंभ कर दी है। अपनी कमाई से घर का कर्जा चुकाया है। नया घर लिया है। अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में भेजना शुरू किया है। ये महिलाएं अपने समुदाय की दूसरी महिलाओं को आत्मसम्मान पूर्ण जीवन के लिए प्रेरित कर रही हैं। ये महिलाएं आजाद जयपुर शहर में सखा कैब टैक्सी ड्राइवर, नगर निगम में सफाई की गाड़ी, बिग बास्केट में डिलीवरी पार्टनर के रूप में कार्य कर रही हैं। महीने का 15-20 हजार रुपए कमाकर सम्मान के साथ अपना जीवनयापन कर रही हैं।

आजाद फाउंडेशन के हरी शर्मा ने बताया कि वीमेन विथ व्हील्स के अंतर्गत उनकी संस्था संसाधन विहीन महिलाओं को ड्राइविंग में प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार देने का कार्य करती है। समग्र कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आजाद फाउंडेशन महिलाओं को ड्राइविंग के ट्रेनिंग के साथ जीवन कौशल, संचार, आत्मसुरक्षा, फर्स्ट ऐड, महिला अधिकार, कानूनी जानकारी आदि पर भी प्रशिक्षण देता है, जिससे ये महिलाएं अपने जीवन में गरिमा के साथ जीवनयापन कर सकें।

कार्यक्रम में ईईएसएल ओर से ऋतू सिंह, उप महाप्रबंधक और राजस्थान के राज्य प्रभारी अमन मेहरडा उपस्थित रहे। आजाद के नेशनल लीड श्रीनिवास राव ने कहा कि महिलाओं को ड्राइविंग जैसे गैर परंपरागत रोजगार में आने से सामाजिक और आर्थिक उत्थान की नई संभावनाएं उत्पन्न हो रही हैं।

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