क्या आपने कभी ग्रीन डेथ के बारे में सुना है ? या कभी आपने ये सुना है की किसी इंसान को मरने के बाद की भी चॉइस मिलेगी ? नही सुना तो हम आपको बता देते है की साल 2027 तक कैलीफोर्निया के लोगों के पास चॉइस होगी कि वे श्मशान में अपना अंतिम संस्कार कराना चाहेंगे, या फिर घर के बगीचे या खेत में खाद बनकर रहेंगे. लगा ना अजीब सुन कर पर वहां के गर्वनर गेविन क्रिस्टोफर ने नए नियम पर दस्तखत कर दिए, जिसे नाम मिला नेचुरल ऑर्गेनिक रिडक्शन 2027.
1. क्या है ये प्रोसेस?
इसके प्रोसेस में घास की तरह ही इंसानी शरीर को भी प्राकृतिक तरीके से गलाकर उसकी खाद तैयार की जाएगी, और फिर उसका उपयोग खेती-बाड़ी में होगा.
2. हाल फिलहाल की स्थिति क्या है?
अभी अंतिम संस्कार के अलग तौर-तरीके हैं. कई लोग मृतक का दाह संस्कार करते हैं तो कई समुदाय शरीर को कॉफिन में डाल कर उसको दफना देते है ।
3. खाद बनने में लगेगा कितना समय ?
कुल 30 दिनों के भीतर शरीर खाद में बदल जाएगा, लेकिन अभी भी इसमें कई तरह के वायरस या बैक्टीरिया जैसा खतरा हो सकते हैं इसलिए इसे धातु के बर्तन से निकालकर ट्रीट किया जाएगा. ये प्रक्रिया लगभग 6 हफ्ते लेगी. अब खाद तैयार है.
4. अभी किस बात पर है आपत्ति?
लेकिन इन दोनों ही प्रचलित तरीकों पर पर्यावरणविद एतराज जताते आ रहे हैं. अगर बात करे दाह संस्कार की तो मृत शरीर को जलाने में काफी प्रदूषण होता है. डेटा की मानें तो एक औसत कद-काठी वाले वयस्क को जलाने पर लगभग 500 पाउंड से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. ये प्रदूषण उतना ही है, जितना 470 मील चलने वाली पुरानी कार से होता है. अगर दफना भी दिया जाता है तो इस दौरान निकलनी वाली गर्मी लगभग 15 सौ डिग्री फैरनहाइट होती है, जो आसपास के जीव-जंतुओं और पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाती है. जमीन की उर्वरता को नुकसान होता है ।
5. दफनाना भी नहीं है कम खतरनाक
आपको जानकर हैरानी होगी की दुनिया के कई देशों में कब्रिस्तान की कमी हैं. यहां लोगों को वेटिंग लिस्ट में डाला जा रहा है. अंतिम संस्कार तभी होगा जब बारी आएगी.
6. क्या होगा नई प्रक्रिया के तहत
शरीर को धातु के कॉफिन में रखने की बजाए इस तरह से रखा जाएगा ताकि वो डिकंपोस्ट होकर खाद में बदल सके. अगर प्रोसेस की बात करे तो इसमें मृतक के शरीर को स्टील के सिलेंडरनुमा बॉक्स में डाला जाएगा. मृत शरीर के नीचे लकड़ियों और पुआल के साथ वनस्पति भी डाली जाएगी.
7. सेहत पर खतरा
श्मशान में दाह क्रिया करवाने वालों को भी जहरीली गैसों से राहत मिलेगी. दाह क्रिया के दौरान फार्मेल्डिहाइड नाम की गैस निकलती है, जो ब्लड कैंसर की वजह बनती है.
8. किसको मिल सकती है ग्रीन डेथ
साल 2019 में ही ये कंसेप्ट आया और ज्यादातर लोगों को इस बारे में खास जानकारी नहीं है, लेकिन जानकारी हो भी जाए तो हर कोई ये नहीं कह सकता कि उसे रिकंपोजिशन वेसल में डालकर खाद बना दिया जाए. इसके लिए भी बाकायदा चुनाव होगा. अगर कोई किसी गंभीर संक्रामक बीमारी का शिकार हो तो उसकी दावेदारी खत्म हो जाएगी इस लिस्ट में टीबी, इबोला और सेक्सुअली ट्रांसमिट होने वाली बीमारियां शामिल है ।











