Chhattishgarh News : ह्यूमन फ्रेंडली कोबरा: ग्रामीणों ने उठाया कोबरा की देखभाल करने का जिम्मा
रायपुर ( UD News Network)। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ह्यूमन फ्रेंडली हो चले एक कोबरा सांप का रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग की टीम ग्राम चारपारा पहुंचने की तैयारी कर रही है। लेकिन उस विषधर पर ऐसी आस्था उपजी है, कि ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को कोबरा का संरक्षण करने से रोक दिया। ग्रामीणों ने वनकर्मियों से कहा है कि, गांव के लोग एक समिति बनाकर उसकी देख रेख करेंगे। ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते वन विभाग की टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

गौरतलब है कि, कोरिया जिले के चार पारा गांव के एक तालाब में घूम रहा कोबरा प्रजाति का सांप पिछले कई दिनों से लोगों की उत्सुकता और कौतूहल का विषय बना हुआ है। वह लोगों के न सिर्फ करीब आ जाता है बल्कि उसे छूने, सहलाने से भी वह भागता नहीं बल्कि शांत भाव से लोगों के करीब बैठा रहता है। हालांकि उसके साथ खिलवाड़ करने पर कोबरा ने एक ग्रामीण का काट लिया था, जिससे उसकी मौत भी हो चुकी है।
यह भी पढ़े | Prajwal Revanna सेक्स स्कैंडल में आया नया मोड़ : उसने मेरी मां के साथ रेप किया, मेरे कपड़े ….
ग्रामीणों ने बनाई समिति
कोबरा के डसने से हुए मौत की खबर के बाद डीएफओ प्रभाकर खलखो की पहल पर कोबरा का रेस्क्यू करने वन विभाग की एक टीम मंगलवार को ग्राम चारपारा पहुंची। ग्रामीणों ने विभाग की टीम को यह कहते हुए रेस्क्यू करने से रोक दिया कि, हमने समिति बनाकर तालाब से सबको बाहर कर दिया है और जिसको भी अब दर्शन करना है वो अब बाहर से ही दर्शन करेगा। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने अपने पैर खिंच लिए और बिना रेस्क्यू किए लौट गए।
यह भी पढ़े | JAIPUR बम धमाकों की बरसी 6 नामचीन स्कूलों में बम से उड़ाने की मिली धमकी
तालाब के मालिक का कहना है कि, इस कोबरा के साथ लोगों की आस्था जुड़ गई है। इनकी हम रक्षा करेंगे, तालाब के अंदर लोगों की आवाजाही बन्द कर दी गई है। जिसको दर्शन करना है, वो बाहर से ही दर्शन करेगा। हम लोगों ने वन विभाग को रेस्क्यू करने से रोक दिया है। कोबरा का रेस्क्यू करने चिरमिरी के रेंजर एसडी सिंह के नेतृत्व में टीम पहुंची थी जिसे बैरंग लौटना पड़ा। उनके आने से पहले ग्रामीणों ने तालाब से लोगो को दूर कर दिया था ताकि और किसी की जनहानि न हो सके।
सांप दूध नहीं पीता
वन्यजिव विशेषज्ञों की माने तो सांप दूध नहीं पीता है। लेकिन यहां के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने हाथों से कोबरा को दूध पिलाया है। उक्त कोबरा तैरते हुए लोगों के पास पहुंचता और फिर उसके मूड के हिसाब से लोगों द्वारा लाए गए दूध को पी जाया करता है। बस यही कारण लोग अपने साथ नारियल, अगरबत्ती और दूध लेकर यहाँ पहुंच रहे हैं।
( देश और दुनिया की ताज़ा खबरें सबसे पहले पढ़ें UJALA DARPAN ( उजला दर्पण ) पर, आप हमें Facebook, Twitter, Instagram, और Youtube पर फ़ॉलो करे )










