कलेक्टर के निर्देशों से कितनी तेज होगी प्रशासनिक रफ्तार, रांझी तहसील में लंबित 10 माह पुरानी सीएम हेल्पलाइन शिकायत अब भी लंबित
बैठकों में संतुष्टिपूर्ण निराकरण के निर्देश, बुजुर्ग की अपनी शिकायत का दस महीने बाद भी समाधान नहीं; आखिर रांझी तहसील में कब आएगी तेजी?
जबलपुर। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में सीएम हेल्पलाइन और स्वामित्व योजना की प्रगति पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शिकायतों को केवल बंद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आवेदक की समस्या का संतुष्टिपूर्ण समाधान होना चाहिए। उन्होंने 50 दिवस से अधिक लंबित शिकायतों को प्राथमिकता से निराकृत करने के निर्देश भी दिए।
लेकिन इन निर्देशों के बीच रांझी तहसील का एक सवाल विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है। एक बुजुर्ग की स्वयं की सीएम हेल्पलाइन शिकायत पिछले दस महीने से लंबित पड़ी है। इतने लंबे समय बाद भी शिकायत का निराकरण नहीं होना तहसील स्तर पर कार्यप्रणाली और निगरानी को लेकर सवाल खड़े करता है।
दस महीने से इंतजार, अब तो निराकरण की रफ्तार बढ़े!
जब प्रशासन 50 दिन से अधिक लंबित शिकायतों को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, तब दस महीने से लंबित शिकायत पर कार्रवाई कब होगी? क्या इस शिकायत के निराकरण के लिए भी किसी विशेष समीक्षा बैठक या अलग निर्देश की आवश्यकता है?
बुजुर्ग की शिकायत लंबित रहने का अनुभव एक बड़ा सवाल सामने रखता है कि जब शिकायतकर्ता को इतने लंबे समय तक समाधान नहीं मिलता, तो सीएम हेल्पलाइन पर संतुष्टिपूर्ण निराकरण के दावों की वास्तविक स्थिति क्या है?
निर्देशों का असर जमीन पर दिखना जरूरी
कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश निश्चित रूप से प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इनका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब रांझी तहसील में लंबित शिकायतों पर भी कार्रवाई हो और शिकायतकर्ताओं को वास्तविक राहत मिले।
अब सवाल सीधे तौर पर रांझी तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों से है—बुजुर्ग की दस महीने से लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायत के निराकरण में आखिर कितनी और तेजी आएगी? क्या अब इस शिकायत पर भी ध्यान दिया जाएगा या यह भी अगली समीक्षा बैठक तक लंबित ही रहेगी?
समीक्षा बैठकों में रफ्तार की बात अच्छी है, लेकिन असली परीक्षा लंबित शिकायतों के निराकरण से होगी। आखिरकार नागरिक को आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए।










