छिंदवाड़ा के ‘वॉश ऑन व्हील्स’ मॉडल से जबलपुर को नई उम्मीद, निगमायुक्त अग्रिम कुमार के सामने शहरी स्वच्छता को मजबूत करने की चुनौती
ग्रामीण स्वच्छता में नवाचार से मिली पहचान, अब जबलपुर में आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित स्वच्छता साथियों और सुरक्षित पेयजल प्रबंधन पर नजर
जबलपुर। ग्रामीण स्वच्छता के क्षेत्र में छिंदवाड़ा से शुरू हुआ अभिनव प्रयोग ‘वॉश ऑन व्हील्स’ अब जबलपुर के लिए भी उम्मीद की नई किरण बन सकता है। छिंदवाड़ा में इस मॉडल से जुड़े रहे नवागत नगर निगम आयुक्त आईएएस अग्रिम कुमार ने जबलपुर की कमान संभाल ली है। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित इस सफल स्वच्छता मॉडल के अनुभव का लाभ जबलपुर की शहरी स्वच्छता व्यवस्था को किस तरह मिलता है।
छिंदवाड़ा में 26 सितंबर 2024 को शुरू हुई ‘स्वच्छता साथी – वॉश ऑन व्हील्स’ पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घरों, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों के शौचालयों की व्यवस्थित सफाई एवं रखरखाव सुनिश्चित करना था। इस मॉडल में स्वच्छता साथियों को आधुनिक सफाई उपकरण, हाई-प्रेशर वॉशर और सुरक्षा किट उपलब्ध कराई गई। डिजिटल बुकिंग और निगरानी व्यवस्था के माध्यम से सफाई सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया।
रोजगार के साथ स्वच्छता को मिला नया स्वरूप
इस पहल की खासियत यह रही कि स्वच्छता को केवल सरकारी जिम्मेदारी तक सीमित न रखकर इसे स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमशीलता से भी जोड़ा गया। प्रशिक्षित स्वच्छता साथी आधुनिक उपकरणों के माध्यम से निर्धारित क्षेत्रों में सफाई सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इससे ग्रामीण स्वच्छता के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी विकसित हुए।
इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। वर्ष 2025 में इसे इंडिया सैनिटेशन कोएलिशन-फिक्की सैनिटेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया।
अब जबलपुर में क्या हो सकता है बदलाव?
जबलपुर जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में इस मॉडल की उपयोगिता और भी व्यापक हो सकती है। सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई, आधुनिक मशीनों से नालियों और अन्य सार्वजनिक परिसरों का रखरखाव, सफाई कर्मचारियों का कौशल विकास तथा डिजिटल माध्यम से कार्यों की निगरानी जैसे क्षेत्रों में नवाचार की संभावनाएं हैं।
इसके साथ ही सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पानी की टंकियों की नियमित सफाई, जल वितरण व्यवस्था का रखरखाव और शिकायतों के त्वरित निराकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
नागरिक सुविधाओं में सुधार की अपेक्षा
नवागत निगमायुक्त अग्रिम कुमार के सामने अब जबलपुर की भौगोलिक परिस्थितियों, बढ़ती आबादी और विस्तृत नगरीय क्षेत्र के अनुरूप स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की चुनौती है। छिंदवाड़ा के अनुभव को जबलपुर की आवश्यकताओं के अनुरूप लागू किया जाता है, तो स्वच्छता प्रबंधन के साथ नागरिक सुविधाओं में भी सकारात्मक बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं।
अब देखना यह होगा कि छिंदवाड़ा में पहचान बनाने वाला ‘वॉश ऑन व्हील्स’ मॉडल जबलपुर में किस रूप में आगे बढ़ता है और शहर की स्वच्छता एवं पेयजल व्यवस्था को कितनी नई दिशा देता है।










