प्रदेश में हनीट्रैप के दो आरोपी गिरफ्तार, अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग का आरोप
पीड़ित से पहले एक लाख रुपये लेने और पांच लाख रुपये की अतिरिक्त मांग करने का दावा; पुलिस जांच में जुटी
प्रदेश। अश्लील वीडियो और तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर लोगों से रुपये ऐंठने के आरोप में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनके आपत्तिजनक वीडियो या तस्वीरें तैयार करते थे और बाद में उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसों की मांग करते थे। मामले में पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग का आरोप
जानकारी के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर मुलाकात या अन्य बहानों से पीड़ितों से संपर्क करते थे। इसके बाद उनके आपत्तिजनक वीडियो या तस्वीरें रिकॉर्ड कर उन्हें बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। आरोप है कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने या परिजनों तक पहुंचाने की धमकी देकर पीड़ितों पर रुपये देने का दबाव बनाया जाता था।
एक लाख रुपये वसूलने के बाद पांच लाख की मांग
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर एक पीड़ित से पहले एक लाख रुपये प्राप्त किए थे। इसके बावजूद उससे पांच लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की जा रही थी। रुपये नहीं देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दिए जाने से परेशान होकर पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत के बाद पुलिस की कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अपराध में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं और अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
इस तरह के मामलों में किसी भी व्यक्ति को निजी तस्वीरों या वीडियो के जरिए धमकाया जाए अथवा पैसों की मांग की जाए, तो उसे घबराने के बजाय पुलिस को सूचना देनी चाहिए। डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित संदेशों को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार हो सकता है।
संपादकीय टिप्पणी: मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी उपलब्ध कराई गई सामग्री पर आधारित है। संबंधित पुलिस थाना, घटना का स्थान, आरोपियों के नाम और आधिकारिक पुलिस बयान उपलब्ध नहीं हैं। प्रकाशन से पहले इन विवरणों की पुष्टि की जानी चाहिए। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।









