अरे कलेक्टर साहब! पहले अपने दरवाजे को तो देखिए…
कलेक्ट्रेट के गेट पर पसरी गंदगी दे रही ‘स्वच्छ सतना’ को चुनौती
सतना। कलेक्टर साहब, शहर की सफाई व्यवस्था पर नजर रखने से पहले जरा अपने ही दरवाजे—कलेक्ट्रेट के गेट नंबर-3—पर नजर डालिए। यहां पसरा कचरा और उठती दुर्गंध व्यवस्था की कहानी खुद बयां कर रही है।
जिस कलेक्ट्रेट से पूरे जिले को स्वच्छता और व्यवस्था के निर्देश दिए जाते हैं, उसी के प्रवेश द्वार पर यदि गंदगी का अंबार लगा हो, तो सवाल उठना लाजिमी है।
साहब, समय रहते सफाई करा दीजिए… कहीं ऐसा न हो कि शहर के साथ-साथ कलेक्ट्रेट भी गंदगी में डूब जाए!
अब सवाल यह है कि जब प्रशासन का अपना दरवाजा ही साफ नहीं है, तो ‘स्वच्छ सतना’ का सपना आखिर कैसे साकार होगा?










