सतना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे!
प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर यात्रियों के बीच घूमता रहा आवारा जानवर, डस्टबिन से खाता रहा कचरा; जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवाल
सतना। रेलवे स्टेशन, जहां प्रतिदिन हजारों यात्री सुरक्षित यात्रा की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। जहां यात्रियों की सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधा रेलवे प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है। लेकिन सतना रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 की बीती रात 8 बजकर 42 मिनट की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आई।
प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर यात्री अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक आवारा जानवर यात्रियों के बीच खुलेआम घूमता हुआ दिखाई दिया। इतना ही नहीं, जानवर यात्रियों के बिल्कुल पास रखे डस्टबिन से कचरा निकालकर खाता नजर आया।
प्लेटफॉर्म पर आसपास यात्री बैठे थे। उनके सामान के साथ बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थान पर आवारा पशु प्लेटफॉर्म तक पहुंचा कैसे?
अगर हादसा हो जाता तो जिम्मेदार कौन?
यदि अचानक यह जानवर किसी यात्री पर हमला कर देता, किसी बच्चे या बुजुर्ग को दौड़ा देता अथवा यात्रियों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
रेलवे यात्रियों से टिकट का शुल्क लेता है और स्टेशन पर सुरक्षा एवं सुविधाओं की व्यवस्था का दावा करता है। ऐसे में यात्रियों के बीच खुलेआम आवारा जानवर का घूमना स्टेशन की निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
मामला केवल आवारा पशु के प्लेटफॉर्म पर पहुंचने तक सीमित नहीं है। डस्टबिन से कचरा खाते जानवर की तस्वीर स्वच्छता व्यवस्था की भी पोल खोलती दिखाई दे रही है। यदि कचरा खुले में या आसानी से पशुओं की पहुंच में है, तो स्टेशन परिसर की सफाई और कचरा प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
रेलवे प्रशासन ले संज्ञान
इस पूरे मामले में रेलवे प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर यह जांच करनी चाहिए कि आवारा पशु प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचा। स्टेशन परिसर में ऐसे पशुओं की रोकथाम के लिए क्या व्यवस्था है और घटना के समय संबंधित सुरक्षा एवं सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी पर क्या स्थिति थी—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
सतना रेलवे स्टेशन पर यात्री सुरक्षित सफर की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन जब प्लेटफॉर्म पर ही सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में दिखाई दे, तो सवाल उठना लाजिमी है—
आखिर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है—रेलवे अधिकारियों की, सुरक्षा व्यवस्था की, सफाई अमले की या फिर भगवान भरोसे बैठे यात्रियों की?










