हे सतना शहर के कर्णधारों अभी जाग जाओ, कुम्भकर्ण भी तुम्हारी नींदों से परेशान हो गया होगा, सतना रेलवे स्टेशन से उतरते ही स्वागत करता है ‘विकास का गड्ढा’!
सतना स्टेशन के बाहर सड़क में गड्ढे, गड्ढों में पानी-कीचड़… यात्रियों का रोजाना इम्तिहान
सतना। शहर के रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही यात्रियों का सामना विकास की चमचमाती तस्वीर से नहीं, बल्कि गड्ढों, कीचड़ और जलभराव से होता है। स्टेशन के बाहर मुख्य सड़क की हालत इन दिनों इतनी खराब है कि बारिश के बाद सड़क और गड्ढों के बीच अंतर करना तक मुश्किल हो जाता है।
स्टेशन पर ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों के लिए शहर का यह पहला दृश्य ही सतना की बदहाल सड़क व्यवस्था का आईना बन गया है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। बारिश होते ही इनमें पानी और कीचड़ भर जाता है। ऐसे में पैदल यात्रियों को संभल-संभलकर निकलना पड़ता है, जबकि ऑटो और दोपहिया वाहन चालकों को गड्ढों के बीच से रास्ता तलाशना पड़ता है।
गड्ढे में सड़क या सड़क में गड्ढा?
स्टेशन के बाहर की स्थिति देखकर यही सवाल उठता है कि आखिर सड़क बची कहां है? कई स्थानों पर गड्ढे इतने गहरे हैं कि वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है। पानी भरे गड्ढे उनकी गहराई छिपा देते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता विशेष रूप से परेशानी का कारण बना हुआ है। जरा सी चूक वाहन को असंतुलित कर सकती है। वहीं पैदल यात्रियों को कीचड़ से बचते हुए सड़क पार करनी पड़ती है।
बाहर से आने वालों को शहर की पहली तस्वीर बदहाल
रेलवे स्टेशन किसी भी शहर का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार माना जाता है। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री यहां पहुंचते हैं। लेकिन स्टेशन से बाहर निकलते ही यदि स्वागत गड्ढों और कीचड़ से हो तो शहर की पहली छवि कैसी बनेगी, यह आसानी से समझा जा सकता है।
बाहर से आने वाले यात्रियों को स्टेशन के आसपास की बदहाल सड़क व्यवस्था देखकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
दुकानदार भी परेशान, कारोबार पर असर
स्टेशन के आसपास व्यापार करने वाले दुकानदारों के मुताबिक सड़क की खराब स्थिति का असर उनके कारोबार पर भी पड़ता है। बारिश के दौरान सड़क पर पानी और कीचड़ जमा होने से ग्राहक दुकानों तक पहुंचने में परेशानी महसूस करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या नई नहीं है। सड़क की मरम्मत और जलभराव की समस्या दूर करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा।
जिम्मेदारी किसकी?
स्टेशन क्षेत्र में सड़क और जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर अब नगर निगम और रेलवे प्रशासन के बीच जिम्मेदारी का सवाल भी खड़ा होता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करें कि सड़क की मरम्मत और जलभराव की समस्या का समाधान किस एजेंसी के जिम्मे है।
लोगों का कहना है कि जिम्मेदारी चाहे नगर निगम की हो या रेलवे प्रशासन की, परेशानी तो जनता की है। यात्रियों को विभागों की सीमा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सुगम रास्ता चाहिए।
शिकायतों के बाद भी कब होगा स्थायी समाधान?
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की स्थिति को लेकर शिकायतें की गई हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई स्थायी सुधार नजर नहीं आया जिससे समस्या खत्म हो सके।
अब सवाल यह है कि स्टेशन के बाहर सड़क की मरम्मत कब होगी? जलभराव से मुक्ति कब मिलेगी? और यात्रियों को गड्ढों व कीचड़ से कब निजात मिलेगी?
रेलवे स्टेशन से उतरते ही ‘विकास’ का यह गड्ढा आखिर कब भरेगा—यह सवाल अब सतना के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रहा है।










