जबलपुर में ‘दस्तक सह स्टॉप डायरिया कैंपेन’ का शुभारंभ, 31 अगस्त तक घर-घर होगी बच्चों की स्वास्थ्य जांच
करीब 2.92 लाख बच्चों की होगी स्क्रीनिंग, विटामिन-ए, ओआरएस और जिंक का होगा निःशुल्क वितरण
जबलपुर। शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने, एनीमिया और कुपोषण की रोकथाम करने तथा बाल्यकालीन गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले में ‘दस्तक सह स्टॉप डायरिया कैंपेन’ का शुभारंभ मंगलवार को शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनमोहन नगर से किया गया। अभियान का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने बच्चों को विटामिन-ए का घोल पिलाकर किया।
यह विशेष स्वास्थ्य अभियान 14 जुलाई से 31 अगस्त तक जिलेभर में संचालित किया जाएगा। अभियान के दौरान गठित दस्तक दल घर-घर जाकर जन्म से पांच वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच करेंगे। स्क्रीनिंग के साथ बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी जाएगी तथा दस्त रोग की रोकथाम के लिए प्रत्येक परिवार को ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां भी निःशुल्क वितरित की जाएंगी।
सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य कुपोषण, एनीमिया, निमोनिया, दस्त, जन्मजात विकृतियों तथा अन्य गंभीर बाल्यकालीन बीमारियों से ग्रसित बच्चों की शीघ्र पहचान कर उन्हें समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना है। इससे शिशु एवं बाल मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकेगी तथा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और समुचित विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने बताया कि जबलपुर जिले में इस अभियान के तहत लगभग 2 लाख 92 हजार 395 बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दस्तक दल पूरी सक्रियता के साथ प्रत्येक घर तक पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करेगा। विटामिन-ए की खुराक बच्चों की आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष अभियान को तकनीकी रूप से और अधिक प्रभावी बनाया गया है। पहली बार डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) टूल का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक बच्चे की स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य स्थिति और रेफरल की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जाएगी। इससे गंभीर रूप से कुपोषित अथवा अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान अधिक सटीक और तेज़ी से हो सकेगी तथा उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अथवा उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मी अभिभावकों को स्वच्छता, हाथ धोने की आदत, सुरक्षित पेयजल के उपयोग, स्तनपान, संतुलित पोषण तथा दस्त से बचाव के उपायों के बारे में भी जागरूक करेंगे।
अभियान के शुभारंभ अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विनोद गुप्ता, संस्था प्रभारी डॉ. अंशुल शुक्ला, जन आरोग्य समिति के भोले शंकर सोनी, संभागीय समन्वयक निहार दीवान, डीपीएम डॉ. उपेंद्र सिंह कुशवाहा, डेटा आरआई मैनेजर विजय पाण्डेय, डीसीएम दीपिका साहू, यूएनडीपी के अतुल करकरे, एपिडेमियोलॉजिस्ट सहित स्वास्थ्य विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।










