EOW और लोकायुक्त की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच जबलपुर नगर निगम में भी बढ़ी सतर्कता, भ्रष्टाचार पर कसेगा शिकंजा?
जबलपुर। मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और लोकायुक्त द्वारा लगातार की जा रही रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई ने सरकारी विभागों में सतर्कता का माहौल बना दिया है। हाल ही में एमपीईबी के दो अधिकारियों को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद विभिन्न शासकीय कार्यालयों में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जबलपुर नगर निगम भी उन विभागों में शामिल है, जहां आम नागरिक समय-समय पर काम के बदले रिश्वत मांगने जैसी शिकायतें उठाते रहे हैं। हालांकि, नगर निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ इस संबंध में वर्तमान में किसी नई EOW या लोकायुक्त कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति सख्त नीति और EOW-लोकायुक्त की सक्रियता के चलते सभी शासकीय विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का दबाव है। यदि किसी भी विभाग में रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आती हैं और उनका सत्यापन होता है, तो संबंधित एजेंसियां वैधानिक कार्रवाई कर सकती हैं।
शहर के नागरिकों का भी कहना है कि सरकारी सेवाएं बिना किसी अवैध लेनदेन के समय पर मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई से व्यवस्था में सुधार होगा और ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।
वहीं, प्रशासनिक हलकों में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी नियमों के अनुरूप कार्य करें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचें। EOW और लोकायुक्त की हालिया कार्रवाइयों को इसी दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है










