शिव पोस्टर की आड़ में छिपाई गई रेट लिस्ट, सिविक सेंटर सुलभ शौचालय में अवैध वसूली का आरोप

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नगर निगम मुख्यालय के पास ही नियमों की अनदेखी, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल

जबलपुर। नगर निगम मुख्यालय के समीप स्थित सिविक सेंटर के सुलभ शौचालय में निर्धारित शुल्क सूची (रेट लिस्ट) को कथित रूप से शिवजी के पोस्टर और टेप की सहायता से ढक दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि रेट लिस्ट को जानबूझकर छिपाकर आम नागरिकों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही है। इस घटना ने न केवल शौचालय संचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि धार्मिक प्रतीकों के उपयोग को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है।

जानकारी के अनुसार नगर निगम आयुक्त द्वारा पूर्व में निर्देश जारी कर सभी सुलभ शौचालयों में निर्धारित शुल्क सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करने के आदेश दिए गए थे, ताकि नागरिकों को सही जानकारी मिल सके और मनमानी वसूली पर रोक लगाई जा सके। इसके बावजूद सिविक सेंटर स्थित शौचालय में रेट लिस्ट को पोस्टर से ढक दिया गया, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक शुल्क की जानकारी नहीं मिल पा रही है।

शहर के कई शौचालयों में एक जैसी शिकायतें

नागरिकों का आरोप है कि केवल सिविक सेंटर ही नहीं, बल्कि त्रिमूर्ति नगर, आगा चौक, मेडिकल क्षेत्र, तीनपत्ती और अन्य कई स्थानों पर संचालित सुलभ शौचालयों में भी रेट लिस्ट को ढकने, हटाने या फाड़ने जैसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इससे यह संदेह गहराता है कि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने का खेल संगठित रूप से चलाया जा रहा है।

फोटो-वीडियो सौंपने के बाद भी कार्रवाई नहीं

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्य नगर निगम प्रशासन को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक न तो किसी जिम्मेदार कर्मचारी पर कार्रवाई हुई है और न ही संस्था के खिलाफ कोई कठोर कदम उठाया गया है। इससे लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

“नो प्रॉफिट, नो लॉस” के दावे पर प्रश्न

सुलभ शौचालयों का संचालन करने वाली संस्था स्वयं को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” के सिद्धांत पर कार्य करने वाली संस्था बताती है। ऐसे में नागरिक पूछ रहे हैं कि यदि संस्था का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है, तो फिर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें लगातार क्यों सामने आ रही हैं? यदि कहीं अनियमितताएं हो रही हैं तो उनकी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही?

निगम प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम आयुक्त से मांग की है कि सिविक सेंटर सहित शहर के सभी सुलभ शौचालयों का औचक निरीक्षण कराया जाए, रेट लिस्ट को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराया जाए तथा निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि यदि अनुबंध की शर्तों का बार-बार उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित संस्था के विरुद्ध अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई पर विचार किया जाए।

बड़ा सवाल

नगर निगम मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित शौचालय में यदि रेट लिस्ट को पोस्टर से ढककर नियमों की अनदेखी की जा रही है, तो शहर के अन्य क्षेत्रों में स्थिति कैसी होगी? आखिर आम जनता से होने वाली कथित अवैध वसूली पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार विभाग कब तक निर्णायक कदम उठाएगा?

(यदि नगर निगम या संबंधित संस्था का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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