केसला के संगठन कार्यालय में गांधी जी की पुण्यतिथि को मानवता दिवस के रूप में मनाया 

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( उजला दर्पण रामगोपाल सिंह सीनियर रिपोर्टर मध्य प्रदेश )

 

आज ३० जनवरी को केसला राजनारायण स्मृति भवन (संगठन कार्यालय) संगठन साथियों एवं समाजसेवियों के द्वारा महात्मा गांधी (मोहनदास करमचंद गांधी) की ७८ वीं पुण्यतिथि को मानवता दिवस के रूप में मनाया। जिसमें वक्ताओं ने गांधी जी के जीवन चरित्र में प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ गांधी जी एवं कस्तूरबा बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।संचालन संगठन साथी कपिल खण्डेलवार ने किया प्रथम वक्ता *डाॅ.समीर खान ने कहा पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी जी ने बेरिस्टरी की पढ़ाई करने के बाद दक्षिण अफ्रीका में काले गोरे के भेद भाव को लेकर पैरवी किया। उन्हें १८९५ में जकरबर्ग रेलवे स्टेशन पर काले गोरे के भेद पर रेलयात्रा नहीं करने दिया। उन्होंने पूरी रात विश्राम गृह में बिताया। यही घटना ने उनके जीवन में उथल-पुथल मचाई और क्रांति तथा सत्याग्रह का मार्ग चुन कर भारत एवं दुनिया में अहिंसा पर जीवनपर्यंत काम किया।

सुश्री तारा वरकड़े समाजसेवी ने कहा गांधी जी ने हमें सत्य अहिंसा के साथ छोटे – छोटे उद्योगों एवं हस्तशिल्प की कारीगरी सिखाया एवं खुद अपने जीवन में भी अपनाया। आज उनके नाम को खत्म करने की साज़िश चल रही है।

दुलेश उईके ने गांधी जी के चंपारण आंदोलन व असहयोग आन्दोलन के माध्यम से न्याय पाने का रास्ता बताया।

संपत यादव ने कहा गांधी जी अहिंसा एवं अध्यात्म को मानने वाले थे।जो आज विचार है।

सम्मरसिंह इवने ने कहा गांधी अहिंसा के पुजारी होकर छुआ छूत,भेद भाव, के खिलाफ थे दुनिया के अस्सी देशों में गांधी की प्रतिमाऐं है,एवं ग्रामसभा व ग्राम स्वराज की कल्पना किया करते थे।जो आज हमें पंचायतें देखने को मिल रही है। गांधी जी की सोच थी कि लोग स्वयं अपने लिए शासन करें।

समाजवादी जनपरिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश महामंत्री फागराम जी ने कहा कि गांधी के शरीर को तो आज से ७८ साल पहले ही मार दिया गया है।अब गांधी जी एक विचार हो गये।पर उस विचार को भी खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। गांधी एवं बुद्ध के देश में बहुत अधिक भेदभाव चल रहा है।उदाहरण महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून, मनरेगा (योजना) का नाम बदलकर जी राम जी योजना बनादी गई है। हम आज इस कार्यक्रम के माध्यम से मानवता दिवस के रूप में संदेश देना चाहते हैं कि लोग सारे भेद भाव को भूलकर इंसानियत व मानवता को अपने जीवन में उतारना होगा। देश में कुछ ऐंसी विचारधारा काम कर रही है जो गांधी जी की विचारधारा और उनके नाम को खत्म करने की साज़िश कर रहे हैं।तथा आज के षड्यंत्रों को समझना होगा।

कपिल खण्डेलवार ने कहा कि गांधी जी स्वराज के माध्यम से गांवों में खुशहाली देखना चाहते थे।

इस मौके पर समीर खान, राधेश्याम मांझी,दुलेश उईके,सम्मरसिंह इवने (पूर्व सरपंच) संपत यादव, सरमा, गुलदार,रेशमसिंह, सुमीत ,तारा बरकड़े जगबतीबाई, लक्ष्मीबाई, अर्चना, पूनम, रामबती ,कपिल व फागराम मौजूद रहे।

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