( उजला दर्पण रामगोपाल सिंह सीनियर रिपोर्टर मध्य प्रदेश )
सवाल यह है — भ्रष्टाचार का भस्मासुर कौन?
सतना लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से चल रहे सड़क भ्रष्टाचार की परतें एक बार फिर खुल गई हैं। कोठी तहसील के पोड़ी–मनकहरी मार्ग (लगभग 3 किलोमीटर) के नवीनीकरण कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सड़क निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब पाई गई कि निरीक्षण के दौरान खुद राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी भड़क उठीं।
औचक निरीक्षण के दौरान मंत्री ने देखा कि सड़क पर पैर रखते ही सतह उखड़ने लगी। मंत्री ने मौके पर ही सवाल उठाया—
“जो सड़क पैर रखने से टूट रही है, वह भारी वाहनों का भार कैसे सह पाएगी?”
निरीक्षण में स्पष्ट हुआ कि सड़क निर्माण केवल कागज़ों में पूरा किया गया है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद शर्मनाक है। घटिया सामग्री, मानकों की अनदेखी और खानापूर्ति के इस खेल पर मंत्री ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित ठेका निरस्त करने के निर्देश दिए और कार्यपालन यंत्री को कड़ी फटकार लगाई।
मंत्री का एक्शन, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम
मंत्री का एक्शन सराहनीय है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि—
इतना बड़ा भ्रष्टाचार आखिर किसके संरक्षण में हो रहा था?
क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत के ऐसा घटिया निर्माण संभव है?
क्या केवल एक सड़क ही खराब है या इसी ठेकेदार द्वारा बनाई गई अन्य सड़कों की हालत भी यही है?
क्या पहले की गुणवत्ता जांच केवल औपचारिकता थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही उन्हें घटिया काम की आशंका थी, लेकिन शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।










