बायस गोदाम पुलिया के नीचे मामला गरमाया, विधायक गोपाल शर्मा पहुंचे मौके पर
जयपुर | जयपुर के बायस गोदाम पुलिया के नीचे स्थित शिवाजी नगर क्षेत्र में करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने नियमों को दरकिनार करते हुए इस बहुमूल्य सरकारी भूमि को घेरने और कब्जे की तैयारी शुरू कर दी थी। यह जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित बताई जा रही है, इसके बावजूद मौके पर निर्माण से जुड़ी गतिविधियां शुरू होने की सूचना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जैसे ही उन्हें जमीन पर कब्जे की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो गई और हंगामे की स्थिति बन गई। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते वे आवाज़ न उठाते, तो करोड़ों की सरकारी संपत्ति निजी हाथों में चली जाती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभागों के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। विधायक ने यह भी निर्देश दिए कि क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को तुरंत शुरू कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के अतिक्रमण की संभावना समाप्त हो सके।
इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे-मोटे अतिक्रमणों पर तुरंत कार्रवाई करने वाला तंत्र, जब बड़े और प्रभावशाली मामलों की बात आती है तो अक्सर निष्क्रिय नजर आता है। लोगों ने आरोप लगाया कि यदि प्रशासन पहले से सतर्क रहता, तो किसी निजी कंपनी को इस तरह की कोशिश करने का साहस ही नहीं होता।
विधायक के हस्तक्षेप के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में अवैध कब्जे या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बायस गोदाम पुलिया के नीचे शिवाजी नगर का यह मामला अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह
-
सरकारी संपत्ति की सुरक्षा,
-
भू-माफिया और निजी कंपनियों की मनमानी,
-
और प्रशासनिक जवाबदेही
की एक बड़ी कसौटी बन गया है।
अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या दोषियों पर ठोस कदम उठेंगे, या यह मामला भी समय के साथ फाइलों में दबकर रह जाएगा?










