खजुराहो। खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में इस वर्ष संवेदनाओं और मानवीय गहराइयों को छूने वाली एक विशेष स्क्रीनिंग होने जा रही है। 19 दिसंबर को Maan Productions की लघु फिल्म ‘Life Is Hope But “Why”’ का प्रदर्शन किया जाएगा। 26 मिनट की इस फिल्म ने अपने विषय, प्रस्तुति और निर्देशन शैली के कारण पहले ही दर्शकों में उत्सुकता जगा दी है। फिल्म का निर्देशन बी.एल. मान (BL MAAN) ने किया है, जिनकी सशक्त दृष्टि और भावनात्मक पकड़ ने कहानी को असाधारण गहराई प्रदान की है। उनके साथ सहायक निर्देशक के रूप में अंकित सेन व सीरत मांडिया जुड़े हैं।

फिल्म दो टूटे हुए जीवनों—राज और जिज्ञासा—की भावनात्मक यात्रा को सामने लाती है, जहां सामाजिक तिरस्कार, व्यक्तिगत पीड़ा और भीतर की खालीपन के बीच वे उम्मीद की खोज करते हैं। राज अपनी पत्नी और बेटी के बिछड़ने की वेदना झेल रहा है, वहीं जिज्ञासा समाज द्वारा ‘बाँझ’ कहे जाने की अमानवीय मानसिक चोट से जूझ रही है। दोनों अनजाने में गलत नंबर डायल करते हैं, और यहीं से कहानी एक नई दिशा लेती है। फोन पर हुई बातचीत धीरे–धीरे उनके दर्द, कमजोरियों और अकेलेपन को कम करते हुए उन्हें एक मानवीय संबंध तक ले जाती है, जो उन्हें जीवन की नई शुरुआत की प्रेरणा देता है।
निर्देशक बी.एल. मान ने इस फिल्म के माध्यम से अत्यंत संवेदनशील विषय को गहरे मानवीय दृष्टिकोण से उठाया है। उनकी निर्देशन शैली इस विचार पर आधारित है कि रिश्तों की असली बुनियाद साथ रहने से नहीं, बल्कि समझ, संवाद और सहानुभूति से बनती है। मान का यह संदेश कि “हर टूटन के पीछे एक नई शुरुआत छिपी होती है”, फिल्म की आत्मा बनकर उभरता है।
बी.एल. मान का कहना है कि फिल्म सामाजिक असमानताओं, भावनात्मक सूखे और मानवीय संवेदनाओं पर एक सार्थक विमर्श प्रस्तुत करती है, जो दर्शकों और जूरी पर एक गहरा प्रभाव छोड़ेगी। खजुराहो जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिल्म का चयन निर्देशक बी.एल. मान की रचनात्मक क्षमता और संदेशप्रधान सिनेमा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
19 दिसंबर की स्क्रीनिंग में अपेक्षा है कि यह फिल्म दर्शकों को न केवल भावुक करेगी, बल्कि उन्हें आशा, संवाद और इंसानियत के महत्व पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित भी करेगी।










