जयपुर, 15 नवंबर। दीनदयाल स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सनातन विचार कोई नया सिद्धांत नहीं बल्कि वही शाश्वत मूल्य हैं जिन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ‘एकात्म मानव दर्शन’ के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह दर्शन आज भी पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है और इसका सार ‘धर्म’ है, जिसका अर्थ मत या पंथ नहीं बल्कि सबकी धारणा करने वाला मार्ग है।
डॉ. भागवत ने कहा कि भारत ने हमेशा सहअस्तित्व का संदेश दिया है और यहां की विविधता संघर्ष नहीं, बल्कि उत्सव का विषय रही है। उन्होंने वर्तमान वैश्विक असमानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का स्थिर अर्थतंत्र मजबूत परिवार व्यवस्था पर आधारित है। विज्ञान और बढ़ती भौतिक सुविधाओं के बावजूद शांति और स्वास्थ्य में गिरावट को भी उन्होंने चिंता का विषय बताया।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बेरवा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान










