“अवार्ड ले गए अफसर, और भूखे मर रहे सफाईकर्मी!” — जबलपुर नगर निगम का असली चेहरा उजागर

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जबलपुर (मध्यप्रदेश)।
जोन-14 के अंतर्गत आने वाले जयप्रकाश नारायण वार्ड क्रमांक 28 में पिछले कई दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। कोठारी मेडिकल से लेकर एयरटेल मोड़ तक का इलाका इस समय कचरे के ढेर और बदबू का अड्डा बन चुका है। स्थानीय लोग नारकीय स्थिति झेलने को मजबूर हैं। वजह—नगर निगम के सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं और इस बार आंदोलन पहले से कहीं ज्यादा उग्र रूप ले चुका है।

क्यों भड़के सफाईकर्मी

हड़ताल पर बैठे सफाईकर्मियों का कहना है कि उन्हें पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। पीएफ की राशि भी जमा नहीं की जा रही और जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी है, वे पूरी तरह मौन हैं। मजदूरों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन सिर्फ आदेश देने में माहिर है, लेकिन मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।

सफाईकर्मियों के शब्दों में—

“भारत में जो जबलपुर को 5वां स्वच्छ शहर का अवॉर्ड मिला है, वह अधिकारियों के दम पर नहीं, हमारी झाड़ू और हमारे पसीने के दम पर मिला है। लेकिन आज वही मेहनतकश कर्मचारी भूख और अपमान झेल रहे हैं, और कुर्सियों पर बैठे अफसर आंखें चुरा रहे हैं।”

कचरे का अंबार, बदबू से हालात बदतर

वार्ड के कई हिस्सों में कचरे के ढेर खुले में पड़े हैं, जिनसे उठती बदबू ने वातावरण को दूषित कर दिया है। मच्छरों और मक्खियों की संख्या बढ़ गई है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। बाजार क्षेत्र, गलियों और मुख्य सड़कें तक कचरे से अटी पड़ी हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों का आना कम हो गया है क्योंकि लोग गंदगी और बदबू से बचने के लिए इस मार्ग से गुजरने से कतराने लगे हैं।

अधिकारियों की चुप्पी और मजदूरों का आक्रोश

सफाईकर्मी लगातार कह रहे हैं कि वे तब तक काम पर नहीं लौटेंगे, जब तक उनका बकाया वेतन और पीएफ का भुगतान नहीं किया जाता। दूसरी ओर, नगर निगम प्रशासन की ओर से न तो कोई ठोस आश्वासन मिला है और न ही वार्ता की कोशिश।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम का यह रवैया गैर-जिम्मेदाराना है।

“सिर्फ फोटो खिंचवाने और अवॉर्ड लेने के समय अधिकारियों को मजदूर याद आते हैं। बाकी समय वे उनकी समस्याओं से मुंह मोड़ लेते हैं,” —एक स्थानीय निवासी ने कहा।

आर्थिक संकट में मजदूर परिवार

लगातार दो महीने से वेतन न मिलने के कारण कई मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई परिवार कर्ज में डूबते जा रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि रोज कमाने-खाने वाले इन सफाईकर्मियों के पास अब खाने तक के पैसे नहीं हैं। कुछ मजदूर तो दूसरों से उधार लेकर अपने घर का चूल्हा जला रहे हैं।

जबलपुर के ‘स्वच्छता अवॉर्ड’ पर सवाल

जबलपुर को बीते वर्षों में भारत के शीर्ष स्वच्छ शहरों में गिना गया है और 5वें स्थान का अवॉर्ड भी मिला है। लेकिन मौजूदा हालात इस तमगे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सफाईकर्मियों का कहना है कि अवॉर्ड के पीछे उनकी दिन-रात की मेहनत है, लेकिन जब उन्हें हक़ देने की बारी आती है तो नगर निगम चुप्पी साध लेता है।
स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली, तो स्वच्छता रैंकिंग पर भी असर पड़ेगा और शहर की छवि धूमिल होगी।

जनता का बढ़ता असंतोष

वार्ड के निवासियों में नगर निगम के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोग कह रहे हैं कि सफाईकर्मी भी इंसान हैं, और उनका समय पर वेतन देना नगर निगम का दायित्व है।
एक व्यापारी ने कहा—

“हमारे क्षेत्र में सफाईकर्मी रोज मेहनत करते थे, तभी बाजार और गली-सड़क साफ रहती थी। अब हालत यह है कि कचरे का ढेर हटाने वाला कोई नहीं है। नगर निगम को तुरंत उनकी मांगें मान लेनी चाहिए।”

संक्रमण फैलने का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे समय तक गंदगी रहने से संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। बरसात का मौसम होने से कचरे से निकलने वाला पानी नालियों में मिलकर जलभराव और बदबू की समस्या को और बढ़ा रहा है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

नगर निगम का आधिकारिक बयान गायब

अब तक नगर निगम की ओर से कोई ठोस आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का कहना है कि आंतरिक बैठकों में इस मसले पर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक मजदूरों को लिखित या मौखिक रूप से कोई आश्वासन नहीं दिया गया। हड़ताल की वजह से शहर के कई अन्य वार्डों में भी सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना

स्थानीय पार्षद और विपक्षी नेता इस मुद्दे को लेकर नगर निगम प्रशासन पर हमलावर हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह मामला नगर निगम की स्थायी समिति और नगर परिषद बैठकों में भी गरमा सकता है।

मजदूरों का अल्टीमेटम

सफाईकर्मियों ने साफ कहा है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और व्यापक करेंगे। इसमें नगर निगम मुख्यालय का घेराव, सड़कों पर प्रदर्शन और मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने जैसे कदम शामिल होंगे।

जबलपुर के जयप्रकाश नारायण वार्ड की मौजूदा स्थिति एक सवाल खड़ा करती है—क्या स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छता अवॉर्ड केवल दिखावे के लिए हैं? अगर इन अभियानों के असली योद्धा—सफाईकर्मी—ही भूख और अपमान झेलने को मजबूर हैं, तो ऐसी व्यवस्था पर गर्व कैसा?
अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन मजदूरों को उनका हक देकर शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर लाता है या फिर यह संकट और गहराता है।

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