ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बने सैकड़ों मकान: इंदौर के कई क्षेत्र गंभीर खतरे में

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ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बने सैकड़ों मकान: इंदौर के कई क्षेत्र गंभीर खतरे में

इंदौर  शहर की नई कॉलोनियों सहित कई इलाकों में सैकड़ों मकान एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित दायरे में बन गयें हैं। यह निर्माण वर्षों पहले स्‍थापित ट्रांसमिशन लाईनों के समीप किए गए हैं जो न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। एम.पी. ट्रांसको ने पिछले तीन वर्षों में ऐसे निर्माणों पर 892 नोटिस जारी किए हैं। एम.पी. ट्रांसको द्वारा अपने स्तर पर तो कई प्रयास किए जाते हैं, साथ ही जिला प्रशासन की मदद से भी अभियान चलाया जाता है । वर्षों पहले स्थापित हुई इन एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बसे रहवासी मकान न केवल विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि यह जनजीवन को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं।

खतरनाक स्थिति वाले क्षेत्र

ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे या आसपास बने मकान और व्यावसायिक गतिविधियां विद्युत सुरक्षा मापदंडों का गंभीर उल्लंघन हैं। इंदौर के लिंबोदी, मुसाखेड़ी, खजराना, मुखर्जी नगर, बाणगंगा, नेमावर रोड, सुखलिया, देवास नाका, खंडवा रोड आदि क्षेत्र ऐसे हैं जहां न्यूनतम सुरक्षा दूरी नहीं है और दुर्घटना की आशंका अधिक है।

दुर्घटनाओं से चेतावनी

खजराना में टीनशेड लगाते समय एक मजदूर की मौत, भोपाल में निर्माण के दौरान गंभीर घायल और जबलपुर में हाईवा वाहन की टक्कर जैसी घटनाएं इस खतरे को स्पष्ट करती हैं।

जागरूकता अभियान जारी

एम.पी. ट्रांसको इंदौर की कार्यपालन अभियंता श्रीमती नम्रता जैन ने बताया कि इंदौर के ऐसे सभी क्षेत्र जहां पहले से ही ट्रांसमिशन लाइनें क्रियाशील है, फिर भी विद्युत सुरक्षा मापदंड़ों को नजर अंदाज कर उनके समीप अनाधिकृत निर्माण कर लिये गये है, उन क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों से दुर्घटना एवं जनहानि होने की आंशका के मद्देनजर वहां पर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा सुरक्षा नियमों की जानकारी घर-घर चस्पा की जा रही है, साथ ही कर्मचारी लाइनों से सुरक्षित दूरी बनाये रखने हेतु पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम से अनाउसमेंट भी कर रहे है। साथ ही जागरूकता एवं जनसुरक्षा के लिये ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने से संभावित खतरों से सचेत भी कराया जा रहा है।

क्यों जरूरी है 27 मीटर का कॉरिडोर

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार, 132 केवी या इससे अधिक वोल्टेज की ट्रांसमिशन लाइन के नीचे कम से कम 27 मीटर की सुरक्षित दूरी आवश्यक है, ताकि हवा में झूलते तारों से संपर्क न हो और दुर्घटना टाली जा सके।

लगातार आ रहे व्यवधान

श्रीमती नम्रता जैन ने जानकारी दी कि जनवरी 2025 से अब तक इंदौर में ट्रांसमिशन लाइनों में 33 बार व्यवधान हुआ, जिसमें 16 बार ट्रिपिंग की वजह ट्रांसमिशन जोन में व्यक्ति या वस्तु का प्रवेश रहा।

600 से 950 गुना अधिक रहती है ट्रांसमिशन लाइनों से जान का खतरा

आम घरों में उपयोग होने वाली विद्युत आपूर्ति की तीव्रता मात्र 230 वोल्ट होती है। यह स्तर भी इतना अधिक होता है कि यदि कोई व्यक्ति गलती से इसके संपर्क में आ जाए तो गंभीर रूप से घायल हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है। लेकिन इससे भी कहीं अधिक खतरनाक होती हैं, इंदौर शहर में क्रियाशील एक्स्ट्रा हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइनें, जिनमें विद्युत तीव्रता 132 केव्‍ही (यानी 132,000 वोल्ट) एवं 220 केवी (यानी 2,20,000 वोल्ट) होती है — जो कि घरेलू बिजली की तुलना में 600 से 950 गुना अधिक रहती है। यह अंतर दर्शाता है कि अगर मात्र 230 वोल्ट के संपर्क में आने से जान को खतरा हो सकता है, तो 132 या 220 केवी की ट्रांसमिशन लाइनों के पास रहने या निर्माण करने से कितना बड़ा जोखिम हो सकता है । ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह जानलेवा जोखिम भी उत्पन्न करता है।

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