“कांवड़ यात्रा को निशाना बना रहे धर्मविरोधी – हिन्दू आस्था पर सुनियोजित विषप्रयोग” – इंद्रजीत चव्हाण।

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(उजला दर्पण राष्ट्रीय समाचार पत्र )

सावन का पावन मास प्रारंभ हो चुका है। भारतभूमि के कोने-कोने में भोलेनाथ के भक्त कांवड़ लेकर निकल चुके हैं। शिवालयों में उमड़ रही श्रद्धा की धारा यह प्रमाण दे रही है कि हिन्दू समाज आज भी अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति जागरूक है।

परन्तु इसी श्रद्धा को कलंकित करने के लिए कुछ कपटी मानसिकता वाले षड्यंत्र रच रहे हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई स्थानों पर यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि कुछ विधर्मी तत्व मुसलमान नाम छिपाकर, हिन्दू देवी-देवताओं के नामों पर भोजनालय चला रहे हैं। ये छद्मवेशी दुकानें भोलेभाले कांवड़ियों को भ्रमित करती हैं — ताकि वे इसे सात्त्विक भोजन समझकर वहीं अन्न ग्रहण करें।

यह कोई साधारण धोखा नहीं — यह हिन्दू आस्था पर सीधा, कुटिल और घातक प्रहार है। यह एक सोची-समझी योजना है, जिससे शिवभक्तों के व्रत को अपवित्र किया जा सके। यह जिहादी मानसिकता का नया रूप है — हिन्दू प्रतीकों का मुखौटा लगाकर हिन्दू धर्म को भीतर से नष्ट करने की कोशिश।

ऐसे दुष्कृत्य करने वालों को चिन्हित कर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने साहसिक कार्य किया है। इन छलपूर्ण भोजनालयों पर कठोर कार्यवाही की गई है और यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कांवड़ यात्रा के मार्ग में भोजन करते समय श्रद्धालु केवल डिजिटल भुगतान करें, ताकि रेस्टोरेंट की मालिकाना पहचान स्पष्ट हो सके। यह धर्मरक्षा का एक सजग कदम है।

वहीं, हिन्दू संगठनों ने भी अब चुप्पी तोड़ दी है। सेवा शिविरों से लेकर हिन्दू स्वामित्व वाले शुद्ध सात्त्विक भोजनालयों की पहचान कर यात्रियों को जागरूक किया जा रहा है। रास्तों पर निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई भी मुस्लिम व्यापारी हिन्दू नाम की आड़ में छल न कर सके।

अब यह समय है सजगता का, समय है मुखर प्रतिकार का।

जो आस्था के वस्त्र ओढ़कर हिंदू धर्म में विष घोलने का दुस्साहस करेगा, उसे संविधान और समाज दोनों से दंड मिलना चाहिए।

अब न कोई भ्रम, न कोई ढील।

हर हिन्दू रहेगा जागरूक, संगठित और सतर्क।

धर्म के साथ छल अब सहन नहीं होगा।

हर हर महादेव!

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