मुस्कान बालिका गृह में निरीक्षण दल की सकारात्मक रिपोर्ट — बच्चियों की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास पर जताया संतोष

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(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके)

इटारसी  पर्यावरण संरक्षण में भी संस्था की सराहनीय भूमिका, शासन निर्देशों के अनुपालन पर दिया गया जोर

  समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग — अनाथ और बेसहारा बच्चियों के संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास को लेकर सरकार गंभीर है। इसी दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग, नर्मदापुरम के निर्देश पर एडीएम श्री डी.के. सिंह के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय निरीक्षण दल ने मुस्कान बालिका गृह, इटारसी का दौरा किया।

इस विशेष निरीक्षण में बच्चियों की दिनचर्या, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा इंतजाम और पुनर्वास कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई। निरीक्षण दल ने बच्चियों से आत्मीय संवाद किया और उनकी जरूरतों को नजदीक से समझा। व्यवस्थाओं को देखकर दल ने संतोष व्यक्त किया और संस्था की पहल की सराहना की।

निरीक्षण के दौरान एडीएम श्री डी.के. सिंह के साथ महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री ललित कुमार डेहरिया, बाल संरक्षण अधिकारी श्री आशु पटेल व श्री रईस कुमार, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र कौरव, सदस्य श्री श्याम सिंह मीणा, श्रीमती सारिका कतरे एवं समाजसेवी डॉ. देवदत्त भी उपस्थित रहे।

संस्था के संचालक श्री मनीष ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में 33 बच्चियाँ संस्थान में निवासरत हैं, जबकि वर्ष 2025 में अब तक 45 बालिकाओं का सफल पुनर्वास किया गया है। सभी बच्चियाँ औपचारिक शिक्षा से जुड़ी हैं एवं उन्हें स्वरोजगार के लिए सिलाई, कढ़ाई, कम्प्यूटर और ब्यूटी पार्लर जैसी गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पर्यावरण की दिशा में भी अनुकरणीय कार्य

निरीक्षण के दौरान एडीएम श्री डी.के. सिंह ने संस्थान परिसर में पूर्व में लगाए गए पौधों का निरीक्षण किया और नए पौधों का रोपण भी किया। उन्होंने कहा कि—

“संस्था का पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है। हर बच्चा एक पौधा लगाए और उसका पालन-पोषण करे, यही सच्चा संरक्षण है।”

शासन का स्पष्ट संदेश: “संवेदनशीलता ही सर्वोच्च प्राथमिकता”

निरीक्षण के पश्चात एडीएम श्री सिंह ने कहा:

“सरकार का लक्ष्य सिर्फ देखरेख नहीं, बल्कि बच्चियों को एक गरिमामय जीवन, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक भविष्य देना है। बाल संरक्षण संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि वे शासन के मानकों का पूरी गंभीरता से पालन करें। बच्चियों को एक ऐसा माहौल मिले जहाँ वे भयमुक्त, सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरपूर जीवन जी सकें।”

निरीक्षण दल ने इसी क्रम में शिशु गृह और जीवोदय संस्था का भी भ्रमण किया और वहां की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुझाव दिए।

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