स्वास्थ्य विभाग में 4558 पदों और पूर्व में स्कूल शिक्षा विभाग में 3.50 लाख पदों का खत्म होना: एक चिंताजनक निर्णय

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(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह)

भोपाल हाल ही में कैबिनेट मंत्री के 11 जून को लिए गए फैसले के अनुसार शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने 4558 पदों को डाइंग कैडर घोषित करने का निर्णय लिया गया है, उनमें सीनियर हेल्थ एजुकेटर, सीनियर फिजियोथेरेपी टेक्नीशियन, हेल्थ एजुकेटर, फिजियोथेरेपी टेक्नीशियन, टेक्नीशियन, ओटी असिस्टेंट, टीबी हेल्थ विजिटर ग्रेड-1, ट्रीटमेंट ऑर्गनाइजर, फाइलेरिया, फाइलेरिया हेल्थ विजिटर, पंप मैकेनिक, सब इंजीनियर मैकेनिकल, सीनियर इलेक्ट्रिशियन असिस्टेंट मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन ग्रेड-3, वेल्डर, ब्लैकस्मिथ, कारपेंटर, सेनेटेरियन, सीनियर सेनेटेरियन, सीनियर हेल्थ इंस्पेक्टर, स्वास्थ्य शिक्षा विस्तार अधिकारी, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, इलेक्ट्रिशियन ग्रेड-1, मेडिको सोशल वर्कर, सैंपल कलेक्टर, दाई, कहार, कुली, प्लंबर और क्लीनर के पद शामिल हैं। जिससे इन पदों पर नई भर्तियों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय सरकार के द्वारा लिया गया है, जिसका उद्देश्य विभागों में अनावश्यक पदों को खत्म करना है।

चिंता का विषय यह है कि इन पदों पर कार्यरत अधिकारी जैसे-जैसे रिटायर होंगे, ये पद खत्म माने जाएंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह एक बड़ा सवाल है। स्वास्थ्य विभाग में पुरुष सुपरवाइजर, ड्रेसर ग्रेड-2, ड्रेसर ग्रेड-1 समेत कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं, जिन पर भर्ती नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।

सरकार का तर्क है कि जिन पदों की आवश्यकता नहीं है, उन्हें खत्म किया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में इन पदों की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय चिंताजनक है। इससे पहले सबसे बड़े स्कूल शिक्षा विभाग में रेग्युलर शिक्षकों, एलडी, यूडीटी और लेक्चरर के 3.50 लाख पदों को डाइंग कैडर कर दिया गया था। इसके बाद इन पदों पर भर्ती नहीं हुई। और नए अध्यापक संवर्ग बनाए गए।

सरकार को स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग में पदों को खत्म करने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए आवश्यक पदों पर भर्ती करने पर विचार करना चाहिए।

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