आखिर कब सोते हैं भोपाल नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार? रात 3 बजे भी शहर की सड़कों पर सक्रिय, लापरवाही पर ठेकेदार को ₹10 हजार का जुर्माना
रंगमहल के सामने मेट्रो निर्माण का मलबा सड़क पर फैलने पर तत्काल कार्रवाई, एएचओ नीतीश मिश्रा ने मौके पर हटवाया मलबा
भोपाल। शहर की स्वच्छता और सड़क सुरक्षा को लेकर भोपाल नगर निगम की सक्रियता रात के सन्नाटे में भी दिखाई दे रही है। नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के नेतृत्व में शहर की व्यवस्थाओं की निगरानी का सिलसिला देर रात तक जारी है। रात 3 बजे भी निरीक्षण और कार्रवाई की यह तस्वीर सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है—आखिर कब सोते हैं आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार, जो शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए रात के तीन बजे भी सक्रिय नजर आ रहे हैं?
जानकारी के अनुसार, रात्रिकालीन निरीक्षण के दौरान रंगमहल के सामने मेट्रो निर्माण कार्य का मलबा सड़क पर फैला हुआ मिला। सड़क पर बिखरा निर्माण मलबा न केवल शहर की स्वच्छता को प्रभावित करता है, बल्कि वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए भी परेशानी पैदा कर सकता है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एएचओ नीतीश मिश्रा ने तत्काल कार्रवाई की। संबंधित ठेकेदार पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया और मौके पर फैले मलबे को हटवाया गया, ताकि सड़क पर आवागमन सुरक्षित और सुचारु बना रहे।
### रात 3 बजे भी निगरानी, लापरवाही पर सख्ती
भोपाल नगर निगम की इस कार्रवाई का संदेश स्पष्ट है कि शहर की स्वच्छता और सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे मलबे का उचित प्रबंधन करें और सार्वजनिक सड़कों पर उसे फैलने से रोकें।
आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के नेतृत्व में रात्रिकालीन निरीक्षण के दौरान सामने आई यह कार्रवाई बताती है कि शहर की व्यवस्थाओं पर निगरानी केवल दिन के समय तक सीमित नहीं है। वहीं, एएचओ नीतीश मिश्रा द्वारा मौके पर कार्रवाई किए जाने से निर्माण मलबे के कारण उत्पन्न समस्या के तत्काल समाधान की कोशिश भी सामने आई है।
### स्वच्छ और सुरक्षित भोपाल की दिशा में पहल
शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए सफाई व्यवस्था के साथ-साथ निर्माण स्थलों की निगरानी भी आवश्यक है। सड़क पर फैला मलबा दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है, इसलिए समय पर उसे हटाना और जिम्मेदार एजेंसियों पर कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है।
रात 3 बजे तक सक्रियता की यह तस्वीर निश्चित रूप से चर्चा का विषय है। अब देखना होगा कि ऐसी सख्ती से निर्माण कार्यों में लापरवाही पर कितना अंकुश लगता है और भोपाल की सड़कों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं।









