पटवारी पर ₹5 हजार मांगने का आरोप, विवाद में मोहित ने नाक पर किया हमला
स्वामित्व योजना के तहत रिकॉर्ड में नाम सुधारने को लेकर हुआ विवाद; पटवारी की शिकायत पर युवक के खिलाफ FIR दर्ज
जबलपुर। जिले के चरगवां क्षेत्र में स्वामित्व योजना के तहत राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधारने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। मामले में पटवारी शुभम विश्वकर्मा पर ₹5,000 की कथित रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। वहीं, इसी विवाद के दौरान मोहित परिहार द्वारा पटवारी पर हमला किए जाने की बात सामने आई है। घटना में पटवारी का चश्मा टूट गया और उनकी नाक पर चोट आई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहित परिहार के पिता का नाम सरकारी रिकॉर्ड में ढिल्लू सिंह के स्थान पर डेलन सिंह दर्ज हो गया था। इस त्रुटि को सुधरवाने के लिए मोहित ने पटवारी शुभम विश्वकर्मा से संपर्क किया था। आरोप है कि कई दिनों तक उसका काम लंबित रहा। इसके बाद गांव के कोटवार के माध्यम से पटवारी द्वारा कथित तौर पर ₹5,000 की मांग किए जाने की बात सामने आई।
बताया जाता है कि मोहित परिहार और पटवारी शुभम विश्वकर्मा के बीच मुलाकात के दौरान पैसों को लेकर कहासुनी हुई। मोहित द्वारा पहले काम पूरा करने और बाद में पैसे देने की बात कही गई, जबकि पटवारी पर पहले ₹5,000 देने की मांग करने का आरोप है। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और आक्रोशित मोहित ने कथित तौर पर पटवारी पर हमला कर दिया। घटना में पटवारी घायल हो गए।
पटवारी की शिकायत पर FIR दर्ज
घटना के बाद पटवारी शुभम विश्वकर्मा ने मोहित परिहार के खिलाफ चरगवां थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(बी), 132, 121(1), 221 एवं 351(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दोनों पहलुओं की जांच जरूरी
इस पूरे मामले ने सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों के कामकाज और कथित अवैध वसूली के आरोपों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकारी कर्मचारी पर हमला करना कानूनन गंभीर अपराध है, वहीं दूसरी ओर पटवारी पर लगाए गए ₹5,000 मांगने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अब प्रशासन के सामने दो अहम सवाल हैं—क्या वास्तव में राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के नाम पर ₹5,000 की मांग की गई थी? और आखिर विवाद की वास्तविक वजह क्या थी?
मामले में निष्पक्ष जांच कर दोनों पक्षों की भूमिका स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि रिश्वत मांगने का आरोप प्रमाणित होता है तो संबंधित कर्मचारी पर भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, मारपीट के मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल रिश्वत मांगने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।










