पटवारियों की हड़ताल से प्रदेश में राजस्व कामकाज ठप, स्वामित्व योजना को लेकर प्रशासन से आर-पार
भोपाल। मध्यप्रदेश में पटवारियों और प्रशासन के बीच विवाद अब गहराता जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि के सर्वे और रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों को लेकर पटवारियों ने आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। प्रदेश के पटवारी संघों ने 7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया है, जबकि 8 से 11 अक्टूबर तक सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान किया गया है।
पटवारी संघ का आरोप है कि स्वामित्व अभियान के तहत होने वाली मुफ्त रजिस्ट्री में पटवारियों पर विक्रेता/निष्पादक की भूमिका निभाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। संघ का कहना है कि इस प्रक्रिया में तकनीकी और कानूनी अड़चनें सामने आ रही हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
निलंबन और सेवा समाप्ति की कार्रवाई से बढ़ा विवाद
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब काम में कथित लापरवाही और धीमी प्रगति को लेकर कई पटवारियों पर कार्रवाई की गई। गुना में चार पटवारियों को निलंबित किए जाने तथा जिले के सभी 52 पटवारियों को सेवा समाप्ति के नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। वहीं देवास, आगर मालवा सहित अन्य जिलों में करीब 27 परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त किए जाने का भी दावा किया गया है।
पटवारी संघ इन कार्रवाइयों को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो गया है।
सरकारी व्हाट्सऐप ग्रुप से सामूहिक एग्जिट
आंदोलन के तहत प्रदेशभर के पटवारियों ने सरकारी और आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुपों से सामूहिक रूप से एग्जिट कर दिया है। इसके साथ ही ऑनलाइन राजस्व कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया गया है। पटवारियों का कहना है कि जब तक निलंबित और सेवा से हटाए गए पटवारियों को बहाल नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों और आम लोगों पर पड़ सकता है सीधा असर
पटवारियों के ऑनलाइन काम बंद करने और सामूहिक अवकाश पर जाने से राजस्व व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। गिरदावरी, नामांतरण, सीमांकन, जाति-निवास प्रमाण पत्र सहित किसानों से जुड़े कई राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं। खाद-बीज से जुड़े कार्यों में भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल विवाद का केंद्र स्वामित्व योजना, पटवारियों की भूमिका और प्रशासन द्वारा की गई दंडात्मक कार्रवाई बना हुआ है। एक ओर प्रशासन योजना के काम को समयसीमा में पूरा कराने पर जोर दे रहा है, वहीं पटवारी संघ अपनी मांगों पर अड़ा है।
अब देखना होगा कि सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या फिर प्रदेश में राजस्व सेवाओं का यह गतिरोध आगे भी जारी रहता है।










