35 हजार की रिश्वत लेते डॉक्टर का दलाल रंगे हाथ गिरफ्तार, मेडिकल रिपोर्ट को ‘भारी’ बनाने का था खेल!

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35 हजार की रिश्वत लेते डॉक्टर का दलाल रंगे हाथ गिरफ्तार, मेडिकल रिपोर्ट को ‘भारी’ बनाने का था खेल!

भरतपुर में सरकारी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी पर गंभीर आरोप, एसीबी की ट्रैप कार्रवाई में दलाल दबोचा गया

जयपुर/भरतपुर, 8 अक्टूबर 2026।
सरकारी अस्पताल में इलाज और मेडिकल रिपोर्ट जैसी संवेदनशील व्यवस्था भी कथित रिश्वतखोरी के खेल से अछूती नहीं रही। भरतपुर जिले के नदबई राजकीय चिकित्सालय में 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते एक निजी व्यक्ति को एसीबी ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया, जबकि जिस वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के लिए रिश्वत लेने का आरोप है, उसे भी सरकारी आवास से डिटेन किया गया है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की धौलपुर चौकी ने यह ट्रैप कार्रवाई की। एसीबी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी त्रिलोकचन्द शर्मा उर्फ चीनू निजी व्यक्ति है, जो कथित तौर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशिकान्त शर्मा के लिए रिश्वत की राशि लेने पहुंचा था।

मेडिकल रिपोर्ट ‘हैवी’ बनाने के नाम पर 35 हजार की मांग!

एसीबी को मिली शिकायत के मुताबिक परिवादी ने नदबई थाने में मारपीट का मामला दर्ज कराया था। उसके परिजनों को आई चोटों का मेडिकल परीक्षण नदबई के सरकारी अस्पताल में होना था। आरोप है कि मेडिकल रिपोर्ट में ‘हैवी एमएलसी’ बनाने के बदले 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।

शिकायत के बाद एसीबी ने गोपनीय सत्यापन कराया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद जाल बिछाया गया।

जेब में पहुंचे 35 हजार और एसीबी ने दबोच लिया

एसीबी टीम ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए कथित दलाल त्रिलोकचन्द शर्मा उर्फ चीनू को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। एसीबी के मुताबिक रिश्वत की रकम आरोपी की पहनी हुई पैंट की जेब से बरामद की गई।

दूसरी ओर, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशिकान्त शर्मा को उनके सरकारी आवास से डिटेन किया गया।

पूरी कार्रवाई एसीबी भरतपुर रेंज के उपमहानिरीक्षक पुलिस ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में एसीबी चौकी धौलपुर के पुलिस उप अधीक्षक प्रेमचन्द मीणा के नेतृत्व में की गई।

सरकारी अस्पताल या रिश्वत का अड्डा?

यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर मेडिकल रिपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए रिश्वत मांगे जाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला सिर्फ 35 हजार रुपये का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और मेडिकल साक्ष्य की विश्वसनीयता से जुड़ा बेहद गंभीर सवाल बन जाता है।

एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच की बात कही है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ और अग्रिम कार्रवाई जारी है।

नोट: आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक/अनुसंधान प्रक्रिया में होगी।

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