नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पालि, प्राकृत, मराठी, असमिया और बांग्ला भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया है। इस उपलक्ष्य में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इन पांचों भाषाओं के विद्वानों ने भारतीय भाषा समिति के माध्यम से भेंट कर आभार व्यक्त किया।
प्राकृत भाषा की ओर से प्रोफेसर धर्मचंद जैन (जयपुर), प्रोफेसर फूलचंद जैन (वाराणसी), प्रोफेसर विजय कुमार जैन (दिल्ली), डॉ. शोभना शाह (अहमदाबाद) और डॉ. तृप्ति जैन (बैंगलोर) ने मंत्री से प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके महत्व पर गहन चर्चा की। विद्वानों ने इस भाषा की समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा को उजागर करने और इसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर विचार-विमर्श किया।
प्राकृत भाषा, जैन आगमों की भाषा होने के साथ-साथ लोक साहित्य की भी रचनाओं में प्रयुक्त होती है। भारतीय संस्कृति, इतिहास और विज्ञान से संबंधित कई महत्वपूर्ण ग्रंथ इस भाषा में रचे गए हैं। प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से इन ग्रंथों और ज्ञान की खोज को प्रोत्साहन मिलेगा।
प्राकृत: समृद्ध विरासत और एकता की भाषा
प्राकृत भाषा का भारतीय भाषाओं में महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि इसके शब्द भारत की अन्य प्रमुख भाषाओं में भी देखे जाते हैं। वसुदेवहिंडी, गाहासतसई, और पउमचरियं जैसे ग्रंथ भारतीय परंपरा में एकता के प्रतीक हैं। प्राकृत भाषा के अध्ययन और उसके प्रसार से भारतीय भाषाओं में एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को और अधिक मजबूती मिलेगी।












