आइए जानते हैं भोपाल नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के व्यक्तित्व, कार्यशैली और उस खास अंदाज के बारे में, जिसके चलते जबलपुर के लोग उन्हें ‘विद्युत मैन’ कहने लगे थे

---Advertisement---

टीकमगढ़ के लाल रामप्रकाश अहिरवार के हाथों में भोपाल की कमान, जबलपुर में अपनी कार्यशैली से कहलाए ‘विद्युत मैन’; अब राजधानी में भी दिख रही वही सक्रियता

आइए जानते हैं भोपाल नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के व्यक्तित्व, कार्यशैली और उस खास अंदाज के बारे में, जिसके चलते जबलपुर के लोग उन्हें ‘विद्युत मैन’ कहने लगे थे।

 

टीकमगढ़/भोपाल। बुंदेलखंड की माटी से निकलकर प्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम आयुक्त की जिम्मेदारी तक पहुंचने वाले आईएएस अधिकारी रामप्रकाश अहिरवार की प्रशासनिक यात्रा अपने आप में प्रेरणादायक है। टीकमगढ़ जिले के पलेरा क्षेत्र के टोरिया गांव से जुड़ाव रखने वाले रामप्रकाश अहिरवार को मध्य प्रदेश सरकार ने 18 अक्टूबर को किए गए प्रशासनिक फेरबदल में भोपाल नगर निगम का नया आयुक्त नियुक्त किया। वे 2018 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

 

इससे पहले वे जबलपुर नगर निगम आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। भोपाल में उन्होंने संस्कृति जैन का स्थान लिया, जिन्हें वित्त विभाग में उपसचिव बनाया गया। इसके साथ ही श्री अहिरवार को मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कंपनी लिमिटेड के अपर प्रबंध संचालक (Additional Managing Director) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।

 

जबलपुर में क्यों कहलाए ‘विद्युत मैन’?

 

रामप्रकाश अहिरवार की कार्यशैली की चर्चा जबलपुर में उनके कार्यकाल के दौरान खूब रही। उनकी सक्रियता, तत्परता और काम के प्रति समर्पण को देखकर लोग उन्हें अनौपचारिक रूप से ‘विद्युत मैन’ कहने लगे थे।

 

उनकी कार्यप्रणाली ऐसी थी कि लोगों के बीच अक्सर यह चर्चा होती थी कि आखिर साहब सोते कब हैं? प्रशासनिक कामकाज में उनकी तेजी, समस्याओं पर तत्काल संज्ञान लेने की प्रवृत्ति और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई।

 

उनकी कार्यशैली में केवल गति ही नहीं, बल्कि काम को प्रभावी ढंग से पूरा करने की समझ और व्यवस्था को व्यवस्थित रूप देने की दृष्टि भी दिखाई देती थी। यही वजह रही कि जबलपुर में उनके काम करने के अंदाज को लेकर लोगों के बीच विशेष चर्चा बनी रही।

 

भोपाल में भी दिखने लगी वही तत्परता

 

राजधानी भोपाल की जिम्मेदारी संभालने के बाद श्री अहिरवार की सक्रियता और निरीक्षण आधारित कार्यशैली चर्चा में है। न्यू मार्केट जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में अतिक्रमण की स्थिति का निरीक्षण करना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना इसी सक्रिय प्रशासनिक दृष्टिकोण का हिस्सा है।

 

भोपाल जैसे बड़े शहर में यातायात, स्वच्छता, अतिक्रमण, नागरिक सुविधाओं और नगर निगम की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में उनकी पूर्व कार्यशैली और जबलपुर के अनुभवों के आधार पर राजधानी में भी बेहतर व्यवस्थाओं की अपेक्षा की जा रही है।

 

प्रशासनिक नेतृत्व की असली पहचान केवल पद से नहीं, बल्कि कार्य करने के तरीके, निर्णयों की तत्परता और व्यवस्था में दिखाई देने वाले बदलावों से बनती है। अब देखना यह होगा कि जबलपुर में अपनी सक्रियता से अलग पहचान बनाने वाले रामप्रकाश अहिरवार भोपाल की चुनौतियों को किस तरह अवसर में बदलते हैं।

 

संघर्ष, शिक्षा और प्रशासनिक सफर

 

रामप्रकाश अहिरवार की शैक्षणिक और प्रशासनिक यात्रा भी उल्लेखनीय रही है।

 

– प्रारंभिक एवं स्कूली शिक्षा टीकमगढ़ में पूरी की।

– इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की।

– मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर बने।

– बाद में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर 2018 बैच के आईएएस अधिकारी बने।

– इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के सीईओ, सागर नगर निगम आयुक्त और जबलपुर नगर निगम आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं।

– फिटनेस, स्विमिंग, टेबल टेनिस और पुस्तकें पढ़ने में उनकी विशेष रुचि है।

 

पलेरा से राजधानी तक, बुंदेलखंड के लिए गर्व का क्षण

 

टीकमगढ़ जिले के पलेरा क्षेत्र के टोरिया गांव से जुड़ाव रखने वाले रामप्रकाश अहिरवार की भोपाल नगर निगम आयुक्त के पद पर नियुक्ति से क्षेत्र में प्रसन्नता और गर्व का माहौल है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र से निकले एक अधिकारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचने का गौरवपूर्ण अवसर भी है।

 

बुंदेलखंड की धरती से निकलकर प्रदेश की राजधानी की नगरीय व्यवस्था की कमान संभालना निश्चित रूप से उनकी प्रशासनिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

 

जबलपुर में जिनकी सक्रियता को लोगों ने ‘विद्युत मैन’ की संज्ञा दी, अब भोपाल में उनकी उसी ऊर्जा, तत्परता और कार्यशैली पर निगाहें टिकी हैं। राजधानी को व्यवस्थित, सुविधाजनक और बेहतर नगरीय व्यवस्था देने की दिशा में उनका अनुभव और नेतृत्व किस तरह परिणाम सामने लाता है, यह आने वाला समय बताएगा।

 

टीकमगढ़ के लाल से भोपाल के आयुक्त तक का यह सफर बुंदेलखंड के लिए गर्व और प्रशासनिक जगत के लिए एक नई जिम्मेदारी की कहानी है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment