आय से 85.57% अधिक संपत्ति मिलने का दावा, रादुविवि के रिटायर्ड कर्मचारी नेता पर लोकायुक्त का केस
41 साल की नौकरी के दौरान संपत्ति जुटाने की जांच, घरों, वाहनों और कृषि भूमि समेत अन्य संपत्तियों की पड़ताल
| जबलपुर
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) के सेवानिवृत्त उच्च श्रेणी लिपिक-2 एवं कर्मचारी नेता वंशबहोर पटेल के खिलाफ लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्रकरण दर्ज किया है। लोकायुक्त की जांच में उनकी संपत्ति और व्यय को लेकर आय के अनुपात में 85.57 प्रतिशत अधिकता पाए जाने का दावा किया गया है। प्रकरण दर्ज होने के बाद अब लोकायुक्त टीम ने आय के अन्य संभावित स्रोतों और संपत्तियों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त मध्यप्रदेश योगेश देशमुख के निर्देशन एवं पुलिस उप-महानिरीक्षक लोकायुक्त मनोज सिंह के नेतृत्व में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में 18 सितंबर को टीम ने रादुविवि के सेवानिवृत्त कर्मचारी वंशबहोर पटेल, पिता कालूराम, उम्र 62 वर्ष, के संबंध में प्राप्त शिकायत की जांच की।
जांच के दौरान टीम के मुताबिक पटेल के पास 91,88,611 रुपये की संपत्ति, जबकि कुल व्यय 1,68,51,337 रुपये पाया गया। लोकायुक्त ने इसे आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति से संबंधित मामला मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1998 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
41 साल से रादुविवि से जुड़ा है नाम
लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार, वंशबहोर पटेल वर्ष 1985 में रादुविवि में दैनिक वेतनभोगी के रूप में पदस्थ हुए थे। बाद में वर्ष 1994 में नियमित कर्मचारी के रूप में नियुक्ति होने की जानकारी सामने आई है। जांच में बरेला क्षेत्र के सालीवाड़ा, पड़रिया और नीमखेड़ा में मकान, छोटे-बड़े वाहनों तथा ग्राम हिनौतिया में करीब 25 एकड़ कृषि भूमि और ट्रैक्टर समेत अन्य संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है।
इन संपत्तियों के स्रोत और अर्जित करने की अवधि को लेकर लोकायुक्त द्वारा दस्तावेजों एवं अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।
आय के दूसरे स्रोतों की भी तलाश
लोकायुक्त की जांच अब केवल सामने आई संपत्तियों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों द्वारा पूर्व कर्मचारी नेता की आय के अन्य संभावित स्रोतों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके लिए रिश्तेदारों, परिचितों और सहकर्मियों से पूछताछ तथा उपलब्ध वित्तीय एवं संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
लोकायुक्त की विवेचना पूरी होने के बाद ही संपत्तियों और आय के स्रोतों को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
नोट: खबर में आरोपों और जांच संबंधी तथ्यों को लोकायुक्त के दावे/सूत्रों के रूप में रखना कानूनी रूप से अधिक सुरक्षित रहेगा।










