निगम की संपत्ति आईडी में ‘खेल’! रिकॉर्ड बदला और फर्जी रसीद से कर दी रजिस्ट्री
एक संपत्ति की दो आईडी, मालिक का नाम और निर्मित क्षेत्रफल बदला; चार के खिलाफ FIR
ग्वालियर। नगर निगम के वार्ड नंबर 30 स्थित टैगोर नगर की एक संपत्ति के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर उसे दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज करने और बाद में फर्जी संपत्तिकर रसीद के आधार पर बेचने का मामला सामने आया है। नगर निगम की जांच में ई-नगरपालिका की लॉग रिपोर्ट से रिकॉर्ड में किए गए बदलावों की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने विक्रेता, खरीदार सहित तत्कालीन निगम अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
शिकायतकर्ता सुरेश बनवानी के मुताबिक संपत्ति की मूल संपत्तिकर आईडी 1000255876 थी। आरोप है कि इसी संपत्ति के रिकॉर्ड में दूसरी आईडी 1000107294 तैयार की गई और इसके जरिए गलत दस्तावेजों के आधार पर दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया।
लॉग रिपोर्ट में दर्ज मिला रिकॉर्ड बदलने का समय
नगर निगम की जांच में सामने आया कि ई-नगरपालिका की लॉग रिपोर्ट के मुताबिक 20 मार्च 2025 को शाम 4:17 से 5:41 बजे के बीच संपत्ति के मालिक का नाम विजय पुत्र राजाराम पाल से बदलकर जयनारायण पुत्र स्वर्गीय उदय सिंह किया गया। इसी अवधि में कॉलोनी का नाम भी बदले जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद 28 मार्च 2025 को संपत्ति के निर्मित क्षेत्रफल में भी बदलाव किए जाने की बात जांच रिपोर्ट में सामने आई।
यूजर आईडी ने बढ़ाए सवाल
जांच में रिकॉर्ड में किए गए बदलावों से जुड़ी लॉग रिपोर्ट में तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक एवं कर संग्राहक नरेंद्र कुशवाह की यूजर आईडी और तत्कालीन APTO महेंद्र शर्मा की ENP 1.0 यूजर आईडी का इस्तेमाल होना पाया गया।
नगर निगम ने नरेंद्र कुशवाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। निगम के अनुसार उनका जवाब 31 जुलाई 2026 को प्राप्त हुआ, लेकिन उसे संतोषजनक नहीं माना गया। नरेंद्र कुशवाह पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि महेंद्र शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
फर्जी संपत्तिकर रसीद से बिक्री का आरोप
जांच में सामने आया कि 15 मई 2025 को जयनारायण ने उक्त संपत्ति अशोक सिंह पुत्र नन्हे सिंह, निवासी यमुना नगर, ग्वालियर को बेच दी। संपत्ति की बिक्री में जिस संपत्तिकर रसीद का इस्तेमाल किया गया, जांच में वह नगर निगम कार्यालय से जारी होना नहीं पाई गई।
आरोप है कि कथित फर्जी संपत्तिकर रसीद तैयार कर उसके आधार पर संपत्ति की बिक्री और रजिस्ट्री कराई गई। यानी पहले निगम के रिकॉर्ड में कथित तौर पर संपत्ति का विवरण बदला गया और इसके बाद उसी आधार पर संपत्ति का सौदा कर दिया गया।
पुलिस को सौंपे अहम दस्तावेज
नगर निगम की जांच के बाद मूल संपत्तिकर रसीद, कथित फर्जी रसीद, लेजर, रजिस्ट्री, टीसी, आरआई रिपोर्ट और ई-नगरपालिका की प्रमाणित लॉग फाइल समेत संबंधित दस्तावेज पुलिस को सौंपे गए हैं।
निगमायुक्त के निर्देश पर कार्यालय अधीक्षक संपत्तिकर ने विश्वविद्यालय थाने में शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विक्रेता जयनारायण, खरीदार अशोक सिंह, तत्कालीन ARI नरेंद्र कुशवाह और तत्कालीन APTO महेंद्र शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की है।
किसने बदला रिकॉर्ड, किसके इशारे पर?
अब जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही संपत्ति की दूसरी आईडी किसने तैयार की, मालिक का नाम और कॉलोनी का विवरण किस आधार पर बदला गया, निर्मित क्षेत्रफल में बदलाव किसने किया और निगम से जारी नहीं हुई संपत्तिकर रसीद आखिर तैयार कैसे हुई? इन सभी बिंदुओं की कड़ियां पुलिस जांच में जुड़ने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।










