जबलपुर। सूत्रों के अनुसार आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल के महानिदेशक कार्यालय द्वारा कलेक्टर, जबलपुर को भेजे गए पत्र के साथ शिकायतकर्ता के आवेदन की मूल प्रति भी संलग्न की गई थी। लेकिन सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में उपलब्ध पत्रावली में शिकायत का मूल आवेदन संलग्न नहीं मिला। यदि यह तथ्य सही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। आखिर शिकायत की मूल प्रति कहां गई? क्या यह महज प्रशासनिक चूक है या फिर किसी सुनियोजित साजिश के तहत महत्वपूर्ण दस्तावेज को पत्रावली से अलग किया गया? यदि ऐसा हुआ है, तो इसमें किस अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका रही और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह पत्र प्रदेश की शीर्ष भ्रष्टाचार जांच एजेंसी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से जारी हुआ था। यदि ऐसी एजेंसी द्वारा भेजे गए आधिकारिक पत्र के साथ संलग्न दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं रह पाते, तो आम नागरिकों द्वारा दिए जाने वाले शिकायत पत्रों की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं।
सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता ने अब पुनः शिकायत पत्र की प्रति उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। साथ ही पूरे प्रकरण में शिकायत शाखा की कार्यप्रणाली, अभिलेखों के रख-रखाव तथा दस्तावेजों के गायब होने की आशंका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई है। यदि दस्तावेज वास्तव में पत्रावली से गायब पाए जाते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय किए जाने का विषय भी बन सकता है।










