उजला दर्पण समाचार पत्र की एक साल लंबी जंग रंग लाई, प्रियंक कानूनगो ने समीक्षा बैठक में खोली वेतन भुगतान की पोल, मजदूरों ने बताया जमीनी सच

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उजला दर्पण समाचार पत्र की एक साल लंबी जंग रंग लाई, प्रियंक कानूनगो ने समीक्षा बैठक में खोली वेतन भुगतान की पोल, मजदूरों ने बताया जमीनी सच

जबलपुर। नगर निगम के स्वच्छता कर्मियों, कचरा वाहन चालकों, हेल्परों और अन्य श्रमिकों के वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं को लेकर उजला दर्पण समाचार पत्र पिछले लगभग एक वर्ष से लगातार अभियान चलाकर सवाल उठाता रहा है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से दस्तावेज जुटाए गए, श्रमिकों की समस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया और नगर निगम प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का लगातार प्रयास किया गया। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी लंबे समय तक मामले को गंभीरता से लेने से बचते रहे।
उजला दर्पण लगातार पूछता रहा – मजदूरों का पूरा वेतन कहाँ गया?
समाचार पत्र द्वारा लगातार यह तथ्य सामने लाया जाता रहा कि अनुबंध के अनुसार स्वच्छता कर्मियों को लगभग ₹12,200 प्रतिमाह भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन अधिकांश श्रमिकों को केवल ₹7,500 से ₹8,000 तक ही वेतन मिलने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इस संबंध में कई बार जानकारी मांगी गई, शिकायतें की गईं, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिले।
प्रियंक कानूनगो ने समीक्षा बैठक में उजागर की हकीकत
हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में प्रियंक कानूनगो ने अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों और दावों पर सवाल उठाए। अधिकारियों ने दावा किया कि श्रमिकों को अनुबंध के अनुरूप पूरा वेतन दिया जा रहा है, लेकिन जब कानूनगो ने स्वयं फील्ड में जाकर मजदूरों से बात की तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें 12 हजार रुपये नहीं, बल्कि लगभग 8 हजार रुपये ही प्राप्त होते हैं।
मजदूरों के इन बयानों ने बैठक में मौजूद अधिकारियों के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए।
एक साल से उठ रहे सवालों पर लगी मुहर
उजला दर्पण समाचार पत्र द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों और उठाए गए सवालों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया, लेकिन समीक्षा बैठक में सामने आए तथ्यों ने उन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है, जिन्हें अखबार लगातार उजागर करता रहा था।
अब जवाबदेही तय होनी चाहिए
यदि नगर निगम द्वारा ठेकेदारों और एजेंसियों को पूरा भुगतान किया जा रहा है, तो मजदूरों तक पूरी राशि क्यों नहीं पहुंच रही? आखिर मजदूरों की मेहनत की कमाई में कटौती कौन कर रहा है? और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शहर की जनता अब यह जानना चाहती है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं, और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

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