जबलपुर।नगर निगम को ठेंगा दिखाते सुलभ इंटरनेशनल संस्था के सेक्रेटरी और निगम के संबंधित अधिकारी
आदेश के बाद भी नहीं दी सूचना—शौचालयों में अतिरिक्त वसूली पर उठे गंभीर सवाल
एक तरफ जबलपुर शहर को स्वच्छता में नंबर वन बनाने के लिए नगर निगम आयुक्त श्रीराम प्रकाश अहिरवार लगातार प्रयासरत दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर में संचालित अधिकांश सुलभ शौचालयों की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। आम नागरिकों का आरोप है कि कई सुलभ कॉम्प्लेक्सों में निर्धारित शुल्क सूची का पालन नहीं किया जा रहा और खुलेआम अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है।
इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए उजला दर्पण समाचार द्वारा सूचना के अधिकार के तहत सुलभ शौचालयों से संबंधित जानकारी मांगी गई। इतना ही नहीं, प्रथम अपील अधिकारी द्वारा स्पष्ट आदेश जारी कर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन इसके बावजूद सुलभ इंटरनेशनल संस्था के सेक्रेटरी तथा नगर निगम के संबंधित अधिकारियों द्वारा जानकारी देने में लगातार टालमटोल की जा रही है। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर ऐसा कौन सा डर सुलभ इंटरनेशनल संस्था और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को सता रहा है, जिसके कारण आदेश के बाद भी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी नहीं दी जा रही है। क्या यह केवल लापरवाही है या फिर सुलभ इंटरनेशनल संस्था और निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के बीच किसी प्रकार की सांठगांठ चल रही है?
यदि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार संचालित हो रही है, तो जानकारी देने से परहेज क्यों किया जा रहा है? और यदि सब कुछ सही है, तो सूचना के अधिकार जैसे कानूनी प्रावधानों की अनदेखी आखिर किसके संरक्षण में हो रही है?
शहर के नागरिकों का कहना है कि सुलभ शौचालयों में निर्धारित दरों से अधिक राशि वसूली की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि कहीं न कहीं व्यवस्था के भीतर ही कोई अदृश्य संरक्षण तंत्र काम कर रहा है।
अब शहर की जनता की निगाहें नगर निगम प्रशासन और आयुक्त पर टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और सुलभ शौचालयों में चल रही कथित अनियमितताओं पर रोक लगेगी, या फिर स्वच्छता अभियान केवल कागजों और नारों तक ही सीमित रह जाएगा?
—आखिर सूचना के अधिकार के आदेश के बाद भी जानकारी क्यों रोकी जा रही है और कब सामने आएगी सच्चाई?
सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर ऐसा कौन सा डर सुलभ इंटरनेशनल संस्था और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को सता रहा है










