नगर निगम सतना में विज्ञापन घोटाले के आरोपों से मचा हड़कंप
सतना। नगर निगम सतना में विज्ञापन वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि कम सर्कुलेशन और सीमित प्रसार संख्या वाले अखबारों पर विज्ञापन राशि की जमकर वर्षा की गई, जबकि सर्वाधिक प्रसार संख्या और व्यापक पाठक वर्ग वाले अखबारों को अपेक्षाकृत कम विज्ञापन दिए गए। इतना ही नहीं, कुछ ऐसे प्रकाशनों को भी विज्ञापन जारी किए जाने की बात सामने आ रही है जिनकी प्रतियां मुख्य रूप से “ऑफिस कॉपी” तक सीमित बताई जा रही हैं।
मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विज्ञापन जारी करने से पहले अखबारों की वास्तविक प्रसार संख्या का सत्यापन किया गया? क्या निर्धारित शासकीय दिशा-निर्देशों और प्रक्रिया का पालन हुआ? क्या विज्ञापन वितरण में पारदर्शिता बरती गई? यदि अधिक पाठक संख्या वाले समाचार पत्रों को नजरअंदाज कर सीमित प्रसार वाले प्रकाशनों को प्राथमिकता दी गई, तो यह न केवल प्रशासनिक निर्णयों पर प्रश्नचिन्ह है बल्कि सरकारी धन के उपयोग की निष्पक्षता पर भी संदेह उत्पन्न करता है।
विज्ञापन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सूचनाओं को अधिकतम नागरिकों तक पहुंचाना होता है। ऐसे में यदि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन न हो, तो जनता तक जानकारी पहुंचाने का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है। स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, विज्ञापन वितरण की सूची सार्वजनिक करने और प्रसार संख्या के स्वतंत्र सत्यापन की मांग उठने लगी है।
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और पारदर्शिता स्थापित करने के लिए कौन से कदम उठाता है। यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना भी आवश्यक माना जा रहा है।










