शंखनाद से स्वास्थ पर एकदिवसीय कार्यशाल

शासकीय विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर के सभागार में शंखनाद एवं स्वास्थ विषय पर एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ शिखा सक्सेना के निर्देशन अनुसार महाविद्यालय के शारीरिक शिक्षा खेल एवं योग विभाग द्वारा शंख के प्रति जागरूकता, स्वास्थ पर पड़ने वाले प्रभाव के विषय में वक्ताओं द्वारा विचार रखे गए, सबसे पहले डॉ रमेश शुक्ला विभाग अध्यक्षशारीरिक शिक्षा द्वारा कार्यशाला के औचित्य तथा आवश्यकता पर प्रकाश डाला शंख बजाने से फेफड़े तथा श्वास नली मजबूत होती है, थाइराइड ठीक होता है आसपास के वेक्टीरिया का खात्मा होता है उसके बाद डॉ सुनीता शर्मा विभाग अध्यक्ष प्राणी शास्त्र द्वारा शंख के प्रकार,निर्माण तथा उपयोग पर प्रकाश डाला, आपने बताया शंख दो प्रकार के होते है तथा जल में रहने वाले जीव द्वारा निर्माण होता है, अगली वक्ता डॉ जया वाजपेई रसायन शास्त्र विभाग द्वारा शंख की रासायनिक प्रक्रिया का वर्णन किया शंख ध्वनि का प्रभाव पड़ता है, डॉ प्रहलाद पटेल क्रीड़ा अधिकारी ने धार्मिक तथा शास्त्री जानकारी देते हुए बताया कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से 6 रत्न के रूप में हुई, पूजा घर तथा पूजा में शंख का अनिवार्य उपयोग होता है, जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर नेमीनाथ जी का प्रतीक शंख है, इसी तरह बौद्ध धर्म द्वारा भी अपने 8 प्रतीक चिन्हों में स्थान दिया, साथ ही प्रत्येक कार्य के शुभारंभ में शंख बजाने की परंपरा है महाभारत के युद्ध में सभी योद्धाओं ने अपने अपने शंख बजाने के प्रमाण है, अगले क्रम में कार्यशाला के आयोजक डॉ विनय पटेल ने शंख बजाने का अभ्यास कैसे तथा किन सावधानियों के साथ करना चाहिए़ बताया, अंत में सभी ने सामूहिक शंखनाद किया, आज के कार्यक्रम में डॉ आर के श्रीवास्तव, डॉ एस एन शुक्ला, डॉ प्रतीक्षा गौर, डॉ राजश्री कपूर, डॉ ज्योति श्रीवास्तव,डॉ ऊषा मसराम, डॉ जी आर के साहू डॉ रुक्मणि अहिरवार, डॉ आकांक्षा चौरसिया, डॉ ओ पी साहू, डॉ सपना सिंह, डॉ प्रहलाद पटेल, डॉ सपना सिंह, डॉ रोहिणी सिंह, अजय रजक,सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
शंखनाद से स्वास्थ पर एकदिवसीय कार्यशाला
by Ankit Sen
Published On: February 12, 2026 8:12 am
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