जयपुर। सनातन धर्म की गूढ़ तांत्रिक एवं शक्ति उपासना परंपरा में माँ बगलामुखी का विशेष स्थान है। शत्रु बाधा निवारण, वाणी की सिद्धि, मानसिक शांति और जीवन में विजय प्राप्ति के लिए जिन देवी शक्तियों की आराधना की जाती है, उनमें माँ पीताम्बरा बगलामुखी को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। इसी आध्यात्मिक परंपरा को साकार रूप देते हुए राजधानी जयपुर के पीताम्बरा लोक स्थित माँ बगलामुखी धाम, कोदेडा–चाकसू में दिनांक 11 जनवरी 2026, रविवार को एक दिव्य एवं विराट 1100 किलो मिर्ची बगलामुखी महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।

यह महायज्ञ माता बगलामुखी शक्तिपीठ समिति, जयपुर के तत्वावधान में आयोजित होगा, जिसमें जयपुर सहित आसपास के जिलों और प्रदेशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार यह यज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, सनातन आस्था और सामाजिक चेतना का महाकुंभ है।

प्राचीन तांत्रिक परंपरा से जुड़ा है मिर्ची बगलामुखी महायज्ञ:
धार्मिक ग्रंथों और तांत्रिक साधना परंपरा के अनुसार माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। उन्हें शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और क्रियाशक्ति को स्तंभित करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। मिर्ची से किया जाने वाला बगलामुखी महायज्ञ विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों, ग्रह बाधाओं, कोर्ट-कचहरी, शत्रु भय और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।
मिर्ची को तांत्रिक दृष्टि से उग्र तत्व का प्रतीक माना जाता है, जो यज्ञाग्नि में समर्पित होकर नकारात्मक ऊर्जा का शमन करती है। 1100 किलो मिर्ची से किया जाने वाला यह महायज्ञ दुर्लभ और अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
तय कार्यक्रम अनुसार होगा आयोजन:
आयोजन की शुरुआत प्रातः 11:00 बजे वैदिक मंत्रोच्चार एवं बगलामुखी बीज मंत्रों के साथ होगी। महायज्ञ का क्रम दोपहर 3:00 बजे तक चलेगा।
इसके पश्चात—
दोपहर 2:00 बजे माँ बगलामुखी को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे
3:00 बजे से 5:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी वितरण होगा
संध्या 6:00 बजे माँ बगलामुखी की महाआरती का आयोजन किया जाएगा
पूरे आयोजन के दौरान वैदिक आचार्यों और साधकों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
जीवन की बाधाओं से मुक्ति का आध्यात्मिक अवसर:
आयोजकों का कहना है कि आज के युग में जब व्यक्ति मानसिक तनाव, नकारात्मक सोच, प्रतिस्पर्धा और अस्थिरता से जूझ रहा है, तब माँ बगलामुखी की उपासना उसे आंतरिक शक्ति और स्थिरता प्रदान करती है। इस महायज्ञ में सम्मिलित होकर श्रद्धालु—
शत्रु बाधाओं से मुक्ति
कार्यों में सफलता
वाणी की मधुरता और प्रभाव
भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा
पारिवारिक और सामाजिक शांति
जैसे फल प्राप्त कर सकते हैं।
सनातन धर्म में सामूहिक यज्ञ को लोककल्याण और विश्व शांति का माध्यम माना गया है। यही कारण है कि यह महायज्ञ व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि सामाजिक और वैश्विक शांति के संकल्प के साथ संपन्न होगा।
आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक सरोकार:
इस आयोजन को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रखा गया है। आयोजकों द्वारा कई सामाजिक और आध्यात्मिक अभियानों को भी इससे जोड़ा गया है, जिनमें प्रमुख हैं—
देवी बगलामुखी सेना
पृथ्वी बचाओ मिशन
एक रोटी मानवता के नाम
बगलामुखी बीज मंत्र लेखन अभियान
इन पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, मानव सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। यह आयोजन मातृशक्ति, सेवा भावना और धर्म के समन्वय का सशक्त उदाहरण बनेगा।
मातृशक्ति और सनातन संस्कृति का संगम:
माँ बगलामुखी को शक्ति, साहस और संरक्षण की देवी माना जाता है। इस आयोजन में मातृशक्ति की विशेष सहभागिता रहेगी, जो सनातन संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान और भूमिका को दर्शाता है। आयोजन स्थल को धार्मिक प्रतीकों, पीतवर्णीय सजावट और वैदिक वातावरण से सजाया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति प्राप्त होगी।
श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपील:
माता बगलामुखी शक्तिपीठ समिति, जयपुर ने जयपुर शहर, चाकसू, कोदेडा सहित आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस दिव्य महायज्ञ का साक्षी बनें और माँ बगलामुखी की कृपा प्राप्त करें।
आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सेवा और धर्म के मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं।
पीताम्बरा लोक में होने जा रहा यह 1100 किलो मिर्ची बगलामुखी महायज्ञ श्रद्धा, साधना और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम है, जो भक्तों को आस्था, शक्ति और शांति का मार्ग दिखाने वाला सिद्ध होगा।









