सतना रेलवे स्टेशन के सामने, जहाँ शहर का चेहरा चमकना चाहिए, वहाँ शराब पीने वालों ने डिस्पोज़ल और प्लास्टिक के कचरे से पूरा इलाका सजा रखा है।स्वच्छता का ढोल तो हर साल जोरों से बजता है,
लेकिन सफाई की झाड़ू शायद वहीं अटक जाती है जहाँ कैमरे नहीं पहुँचते।
रेल चौपाटी का नज़ारा देखिए — गिलास, बोतलें, डिस्पोज़ल प्लेटें, गंध और बदबू…
मानो यह “गंदगी चौपाटी” बन गई हो।अफसर कहते हैं “सफाई नियमित हो रही है,”
लेकिन जनता पूछ रही है — “कहाँ? किस दिन?”
क्योंकि जो नज़र आ रहा है, वो शर्मिंदा करने वाला है।“सतना में सफाई का दिखावा परंपरा बन चुका है,
और गंदगी फैलाना पहचान।”कुछ दिन अभियान चलता है, पोस्टर लगते हैं, फोटो खिंचती है —
फिर वही हाल: नालियां जाम, कूड़ा सड़क पर, और शराबियों का डिस्पोज़ल साम्राज्य जस का तस।रेलवे स्टेशन के सामने का ये दृश्य बताता है किसफाई सिर्फ रिपोर्ट में होती है, ज़मीन पर नहीं।
अवॉर्ड की दौड़ तो जारी है,
पर शहर की हालत कह रही है —
“यहाँ सफाई नहीं, सफाई का नाटक हो रहा है।”










