“यह सरकार विकास नहीं, आदिवासियों का विनाश चाहती है!”
भाजपा का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र बेनकाब – भारत आदिवासी पार्टी का ऐलान: अब खून उबलेगा, आंदोलन उगेगा!
जबलपुर –
मध्यप्रदेश की धरती पर आदिवासियों के खिलाफ एक चुपचाप नस्लीय युद्ध चल रहा है — और इसे लड़ा जा रहा है कलम और कागज़ की मार से। भाजपा की सरकार संविधान के खिलाफ जाकर आदिवासियों को मिटाने की योजना पर काम कर रही है।
मोहन युइके (जिला अध्यक्ष, भारत आदिवासी पार्टी) ने ज़ोरदार लहजे में एलान किया:
“ये कोई विकास योजना नहीं, यह आदिवासी उन्मूलन का मिशन है। हमारी जमीनें छीनी जा रही हैं, हमारी सीटें छीनी जा रही हैं, अब हमारी पहचान पर हमला हो रहा है।
कैसे रची जा रही है आदिवासी समाज की साजिशनुमा हत्या?
पहला हमला: आदिवासी ज़मीनों को खामोशी से जनरल में बदला जा रहा है
दूसरा हमला: टाइगर रिजर्व, बांध और खनन परियोजनाओं की आड़ में गांव उखाड़े जा रहे हैं
तीसरा हमला: विस्थापन के ज़रिए आदिवासियों को खुद ही बाहर धकेलने की चाल
चौथा हमला: चुनावी सीटों को गैर-आदिवासी घोषित करने की पृष्ठभूमि तैयार
पाँचवाँ हमला: जो आवाज उठाए, उसे फंसाओ, बदनाम करो, खत्म कर दो!
भारत आदिवासी पार्टी का ऐलान: अब कोई चुप नहीं बैठेगा!
> “हमने RTI दाखिल की है — पिछले 10 साल में कितनी आदिवासी ज़मीनें छीनी गईं, अब सच सामने आएगा। अगर जवाब छुपाया गया, तो हमारी आवाज विधानसभा की दीवारें चीर देगी!”
सरकार को खुली चेतावनी:
आदिवासी ज़मीनों पर चल रहा ट्रांसफर खेल तत्काल बंद करो
जिन अफसरों ने ज़मीन लूटी, उनकी जांच हो
सूदखोरों को जेल भेजो
पुराने ज़मीन सौदों की CBI जांच हो।
वरना याद रखो – ये आदिवासी झुकते नहीं, जल उठते हैं!
> “अगर एक इंच भी ज़मीन छीनी गई, तो सड़कों पर लावा बहेगा। जबलपुर से दिल्ली तक सत्ता की नींव हिलाएंगे। ये लड़ाई अब जमीन की नहीं, अस्मिता की है। भाजपा – तैयार हो जाओ!”
मोहन युइके का सिंहनाद:
> “भाजपा की सरकार संविधान के विरुद्ध जा रही है। हम उसे आदिवासी खून से जवाब देंगे – लोकतांत्रिक, जनवादी और निर्णायक। अब न डरेंगे, न रुकेंगे। भारत आदिवासी पार्टी अब आर-पार की लड़ाई में उतर चुकी है!”
*यह सिर्फ खबर नहीं, विद्रोह की चिंगारी है!
अब आदिवासी बोलेगा – और जब बोलेगा, तो सत्ता काँपेगी!**











