
अनावसीय व्यक्तित्व विकास शिविर ।
दिनांक 6 अप्रैल से 10 अप्रैल 2025
स्थान कॉम्पिटिशन जी एस मंत्रा विजयनगर जबलपुर
पांच दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर में कुल 17 पंजीयन हुए प्रतिदिन की औसतन उपस्थित 15 शिविरार्थी (बच्चें) और 7 कार्यकर्ता उपस्थित रहें। व्यक्तित्व विकास शिविर में बच्चों में पंचस्तरीय विकास शारीरिक मानसिक ,बौद्धिक ,भावनात्मक आध्यात्मिक विकास को लेकर चर्चा सत्र व गतिविधि की गई ।
प्रथम दिवस अभिनेष कटेहा जी ने हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है, भारत के कल्याण में ही हमारा कल्याण है, इस विषय को लेते हुए सहजता से बच्चों के बीच विषय रखा।
बच्चों ने उत्साह पूर्वक चर्चा सत्र में भाग लिया और देश को जानने का प्रयास किया !
द्वितीय दिवस स्नेहलता दीदी ने मोबाइल की लत से आजादी सत्र लिया।
तृतीय दिवस आस्था दीदी ने हेल्थ एवं हाइजीन विषय पर बच्चों का मार्गदर्शन किया ।
चतुर्थ दिवस माया दीदी ने शारीरिक और मानसिक विकास, स्मरणशक्ति और एकाग्रता विषय पर चर्चा की । जिसमें हमारे पांच ज्ञानेंद्रिय का व्यवस्थित प्रयोग करने से स्मरण शक्ति की क्षमता बढ़ेगी और याद किए गए विषय का प्रगटन सरल होगा। साथ ही एकाग्रता बढ़ाने के प्रयोग बच्चों को सिखाएं ।
पांचवें दिन आत्मविश्वास से ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, माननीय एकनाथ जी रानडे विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के संस्थापक का जीवन चरित्र लेते हुए बच्चों से चर्चा की।
प्रत्येक दिन प्रेरक वीडियो , चर्चा सत्र और अंत में 45 मिनट संस्कार वर्ग में पंचस्तरीय विकास को लेते हुए चपलता, तितिक्षा, बौद्धिक क्षमता, बल वर्धक, एकाग्रता, सजगता बढ़ाने वाले खेल खेले गए। उदाहरणार्थ रामायण के पात्रों के नाम, फल फूल सब्जी, बम फटा, अंगूर दौड़, नमस्ते जी, केंद्र चलो ,चरण स्पर्श, डमरू दौड़, राम श्याम, सांप नेवला, सहायता, दिशा दर्शन, इन खेलों के माध्यम से बच्चों का टीम कोऑर्डिनेशन और तत्परता, शारीरिक बल बढ़ाने का प्रयास किया गया।
प्रत्येक दिन एक प्रेरणादाई कहानी बच्चों को सुनाई गई जिसमें अरुणिमा सिन्हा, स्वामी विवेकानंद, मदनलाल ढींगरा, एकानाथ जी की कहानी हुईं। पांच दिन बच्चे उत्साह पूर्वक कड़ी धूप में 4:00 बजे अपनी कक्षा के लिए उपस्थित होते थे, जिससे उनकी लगन और रुचि को समझ सकते हैं । आनंद के साथ 5 दिन के शिविर के पश्चात प्रति रविवार शाम 5 से 6:30 बजे तक पार्क विजयनगर में संस्कार वर्ग का आयोजन किया जाएगा, ऐसा निश्चित हुआ। जिन पालकों ने अपने बच्चों को प्रेरणा देते हुए नियमित भेजा उन सभी को साधुवाद,













सबसे अच्छी पहल। निडरता से सभी की खबर लगती है।