UGC के नए इक्विटी नियमों पर देशभर में बवाल: सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक सवर्ण विरोध, जानिए पूरा मामला

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उजला दर्पण डिजिटल डेस्क ( नई दिल्ली )| यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए ‘इक्विटी रेगुलेशन्स, 2026’ को लेकर देशभर में तीखा विरोध देखने को मिल रहा है। जनरल कैटेगरी के छात्र और सवर्ण समाज के लोग इन नियमों को अपने खिलाफ बताते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में विरोध ने उग्र रूप ले लिया है। यूपी के पीलीभीत में सवर्ण युवकों ने सामूहिक मुंडन कराकर आक्रोश जताया, वहीं बिहार में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पोस्टरों पर कालिख पोती गई और फांसी जैसी प्रतीकात्मक मांगें की गईं।

इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जता दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने साफ किया कि अदालत हालात से वाकिफ है और यदि नियमों में खामियां हैं, तो उन पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मामले को जल्द सूचीबद्ध किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब यह मुद्दा सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायिक जांच के दायरे में भी आ चुका है।

UGC ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन्स, 2026’ को अधिसूचित किया था। इन नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विशेष इक्विटी कमेटी, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्थाएं मुख्य रूप से SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों की शिकायतों की सुनवाई के लिए होंगी। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता, संवेदनशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

हालांकि जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण संगठनों का आरोप है कि इन नियमों से उन्हें संदेह की नजर से देखा जाएगा और कैंपस में उनके खिलाफ भेदभाव को वैध रूप मिल सकता है। उनका कहना है कि इससे कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसरों में टकराव और अराजकता बढ़ने की आशंका है। आलोचक यह भी तर्क दे रहे हैं कि बिना सभी वर्गों से संवाद किए ऐसे नियम लागू करना सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

UGC के ये नियम संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर लाए गए हैं, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कर रहे हैं। समिति ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटी को अनिवार्य बनाने की बात कही थी। इसके पीछे रोहित वेमुला, डॉ. पायल तड़वी समेत कई चर्चित मामलों का हवाला दिया गया, जिनमें संस्थागत जातिगत भेदभाव के आरोप सामने आए थे और सुप्रीम कोर्ट तक सख्त टिप्पणियां हुई थीं।

अब यह मामला सामाजिक बहस, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और न्यायिक समीक्षा—तीनों के केंद्र में आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई से यह तय होगा कि UGC के ये नए नियम उच्च शिक्षा में संतुलन का माध्यम बनेंगे या फिर नए विवादों की वजह।

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