शिक्षा के मंदिर में धर्म और भेदभाव का व्यापार, सतना के मिशनरी स्कूल पर गंभीर आरोप।

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शिक्षा के मंदिर में धर्म और भेदभाव का व्यापार, सतना के मिशनरी स्कूल पर गंभीर आरोप। सतना का एक प्रतिष्ठित ईसाई मिशनरी स्कूल इन दिनों न केवल शैक्षणिक कारणों से, बल्कि अपने परिसर के भीतर हो रही गंभीर अनियमितताओं और पक्षपाती गतिविधियों के कारण चर्चा में है। प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि स्कूल प्रबंधन शिक्षा के पावन उद्देश्य से भटक कर, कथित तौर पर धर्मांतरण, क्षेत्रीय भेदभाव और खाद्य सुरक्षा उल्लंघन जैसे संवेदनशील मुद्दों में उलझ गया है।

धर्मांतरण का अवांछित प्रोत्साहन: योग्यता से अधिक वफादारी

स्कूल के प्रशासनिक गलियारों से मिली सूचनाएँ चौंकाने वाली हैं। एक स्टाफ कर्मचारी को धर्म परिवर्तन करने के एवज में विशेष रूप से उपकृत करने का आरोप है। इस कर्मचारी को, बिना स्पष्ट योग्यता के, सीधे स्कूल मैनेजर का निजी सचिव (Personal Secretary) बना दिया गया है।सबसे अधिक आपत्तिजनक तथ्य यह है कि इस नव-परिवर्तित कर्मचारी की मासिक तनख्वाह डिग्री-धारी एवं योग्य योग शिक्षकों के वेतन से दोगुनी है। यह विसंगति सहज ही यह निष्कर्ष निकालने की ओर इशारा करती है कि यह पदोन्नति कार्य-क्षमता के बजाय धार्मिक निष्ठा को पुरस्कृत करने का एक स्पष्ट प्रयास है।

शिक्षकों और स्टाफ के बीच उत्तर-दक्षिण का विभाजन यह बात सामने आई है कि स्कूल के अंदर शिक्षकों और अन्य स्टाफ के सदस्यों के बीच उत्तर भारतीय (North Indian) और दक्षिण भारतीय (South Indian) होने के आधार पर गंभीर भेदभाव किया जाता है। एक शैक्षणिक संस्था, जिसका काम देश को जोड़ने का है, उसमें इस तरह का क्षेत्रीय ध्रुवीकरण और पक्षपात न केवल कर्मचारियों के बीच द्वेष पैदा करता है, बल्कि यह राष्ट्रीय अखंडता के मूल्यों के भी विरुद्ध है।

पारदर्शिता और कठोर जाँच समय की माँग

सतना के इस मिशनरी स्कूल से जुड़ी ये घटनाएँ शिक्षा की आड़ में हो रही नैतिक और कानूनी अनियमितताओं की ओर इशारा करती हैं। धर्मांतरण के आरोप, स्पष्ट वेतन विसंगति के साथ प्रशासनिक पद पर बैठाना, और क्षेत्रीय/धार्मिक आधार पर भेदभाव—ये सभी तथ्य एक गहन और निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे स्कूल में संचालित कैंटीन एवम अन्य गतविधियों की जाँच करे, भर्ती प्रक्रियाओं और वित्तीय पारदर्शिता की भी तत्काल ऑडिट कराएँ, ताकि शिक्षा के इस मंदिर की शुचिता को बहाल किया जा सके।बड़ा सवाल ये हैं कि शिक्षा के मन्दिर में शिष्टाचार, सांप्रदायिक भेदभाव छेत्रवाद मुक्त बात करने वाला प्रबंधन दक्षिण भारतीय एवम उत्तर भारतीयों के बीच हो रहे भेद भाव धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने पर आमादा हैं ऐसे में कही न कही शिक्षा के मन्दिर में धर्मांतरण की काली छाया मंडरा रही है लिहाजा जिला प्रशाशन को चाहिए की ईसाई मिशनरी के संस्थानों के इस कूट रचित कृत्य कि सघन जाँच करे।।

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