संस्कारधानी जबलपुर ने कई आयुक्त देखे हैं, पर कुछ नाम ऐसे होते हैं जो फाइलों से नहीं, फील्ड से पहचाने जाते हैं। नगर निगम जबलपुर के आयुक्त श्री राम प्रकाश अहिरवार ऐसे ही आयुक्तों में गिने जा रहे हैं, जिनकी कार्यशैली अब शहर की पहचान बनती जा रही है।
दिन-रात की मेहनत, सुबह 6 बजे से स्वयं फील्ड में उतरकर पैदल निरीक्षण, गली-मोहल्लों की सफाई से लेकर बड़े प्रोजेक्ट्स तक—हर छोटी से छोटी बात पर उनकी पैनी नज़र है। वे सिर्फ निर्देश देने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि काम को ज़मीन पर उतरते देखने वाले आयुक्त हैं। जहाँ समस्या दिखी, वहीं समाधान की पहल—और जहाँ लापरवाही मिली, वहीं तत्काल एक्शन।
शहर की स्वच्छता व्यवस्था हो, कचरा प्रबंधन, नालों की सफाई, सार्वजनिक स्थलों की स्थिति या नागरिक सुविधाएँ—हर विभाग में आयुक्त की सक्रिय निगरानी साफ़ दिखाई देती है। अधिकारी-कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश है कि अब काम सिर्फ काग़ज़ों में नहीं, नज़र भी आना चाहिए। यही कारण है कि निगम के हर विभाग में जवाबदेही का माहौल बन रहा है।
आयुक्त अहिरवार की कार्यशैली में अनुशासन के साथ-साथ संवेदनशीलता भी है। वे शहर को महज़ प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि अपनी ज़िम्मेदारी मानते हैं। शायद यही वजह है कि अब लगने लगा है कि संस्कारधानी को वह आयुक्त मिला है, जिसे उसने स्वयं चुना हो—जो शहर की धड़कन समझता है और उसके भविष्य को लेकर गंभीर है।
नगर निगम जबलपुर की तस्वीर बदलने की यह कोशिश सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि नियत, नीयत और निरंतर निगरानी की मिसाल है। अगर यही रफ्तार और प्रतिबद्धता बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब जबलपुर स्वच्छता, व्यवस्था और सुशासन का एक नया मानक स्थापित करेगा—और इसके केंद्र में होगा एक आयुक्त, जो हर सुबह शहर के साथ जागता है।













