(अंकित सेन उजला दर्पण)
जबलपुर (उजला दर्पण): स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों का कहना है कि मैदान में मुश्किल से 8–10 सफाईकर्मी ही दिखाई देते हैं, लेकिन प्रदीप मस्टर रोल में पूरे स्टाफ को दर्ज दिखाते हैं। सवाल यह उठता है कि जब कर्मचारी काम पर आते ही नहीं, तो वेतन किस आधार पर दिया जा रहा है और पैसा आखिर जा कहाँ रहा है। आरोप यह भी है कि प्रदीप की दबंगई और उदासीन रवैये के कारण कर्मचारी काम करने से कतराते हैं, वहीं वार्ड की नालियां, गलियां और कचरे के ढेर जस के तस पड़े रहते हैं। जनता का कहना है कि प्रदीप सिर्फ कागजों में सफाई दिखाने का खेल खेल रहा है जबकि हकीकत में वार्ड गंदगी से कराह रहा है। लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि मजदूर प्रदीप के डर और दबाव के कारण काम करने नहीं आते। गुस्साए नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर नगर निगम प्रशासन ने प्रदीप पर कार्रवाई नहीं की तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे। उजला दर्पण की मांग है कि वार्ड 35 के मस्टर रोल और भुगतान की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो सुपरवाइज़र प्रदीप सहित जिम्मेदार अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों पर गाज गिराएगा या फिर प्रदीप जैसे जिम्मेदारों को बचाने का खेल जारी रखेगा।











