( उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके )
हफ्तों से जस का तस पड़ा है खतरा, क्या किसी की जान जाने के बाद ही जागेगा नगर निगम?
जबलपुर | शहर के रानीताल मुक्तिधाम में बना गड्ढा अब जानलेवा खतरा बन चुका है। मुख्य द्वार के ठीक सामने मौजूद यह गड्ढा हफ्तों से वहीं पड़ा है, लेकिन नगर निगम का अमला अब तक आंखें मूंदे बैठा है। यह गड्ढा सड़क से होते हुए सीधे करीब 10 फीट गहरे नाले में जा गिरता है। अगर कोई राहगीर, बच्चा, बुजुर्ग या वाहन इसमें फिसल गया, तो सीधा मौत के मुंह में जा सकता है।
हफ्तों से दिख रहा खतरा, लेकिन नगर निगम बेपरवाह
यह इलाका नगर निगम के जोन क्रमांक 2 में आता है। अफसर और सफाईकर्मी हर दिन इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन कोई सुध लेने नहीं आया। चार दिन नहीं, पूरे हफ्तों से यह गड्ढा उसी हालत में पड़ा है — न कोई चेतावनी बोर्ड, न कोई बैरिकेडिंग। यह लापरवाही नहीं, सीधी अनदेखी है।
“मैं ही अब खतरा बन गया हूं…”
अगर रानीताल मुक्तिधाम खुद बोल पाता, तो शायद यही कहता —
“मुझे लोग अंतिम विदाई देने आते हैं, लेकिन अब मैं खुद बर्बादी की कगार पर हूं।”
गंदगी में थोड़ी राहत, पर सुरक्षा अब भी सवालों में
बीते दिनों गेट के पास फैली कुछ गंदगी जरूर हटाई गई है, लेकिन बगल में बहता नाला अब भी बजबजा रहा है। और उससे बड़ा खतरा बना है यह गड्ढा, जिसे न भरा गया, न ढंका गया। श्रद्धालु और अंतिम यात्रा में आए लोग अब भी असुविधा और दुर्गंध के बीच अपनों को विदा करने को मजबूर हैं।
नगर निगम क्या चाहता है?
लोग पूछ रहे हैं —
“क्या नगर निगम को किसी की जान जाने का इंतज़ार है?”
“हफ्तों से खड़ा यह खतरा क्या उनकी नजर में नहीं आया?”
“या फिर मुक्तिधाम जैसी जगहों की सुरक्षा उनके एजेंडे में ही नहीं है?”
जिम्मेदार अब भी खामोश
जोन 2 के सीएसआई विष्णुकांत दुबे को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ रही है। वहीं महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू से भी लोग अपील कर रहे हैं कि ‘संस्कारधानी’ का दावा करने से पहले मुक्तिधामों की हालत पर नजर डालें।
चेतावनी: आंदोलन की तैयारी
स्थानीय लोगों ने साफ किया है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। यह सिर्फ गड्ढा नहीं, सिस्टम की गहराई तक फैली लापरवाही और असंवेदनशीलता की पहचान है।
अब सवाल साफ है — क्या जिम्मेदार जागेंगे, या फिर किसी की बलि चढ़ने का इंतजार करेंगे?












