(रिपोर्ट: अंकित सेन स्टेट हेड उजला दर्पण समाचार पत्र )
जबलपुर : रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 से बाहर निकलते ही पहली नजर में दिखने वाली डामर की परत दरअसल भ्रष्टाचार की एक परत है। सड़क पर ऊपरी तौर पर डामरीकरण कर दिया गया है, लेकिन जैसे-जैसे चौराहे की ओर बढ़ते हैं, सच्चाई सामने आने लगती है। जगह-जगह उखड़ती , बारीक डस्ट डामर की परतें और असमान सतहें बता देती हैं कि यह महज लीपापोती है, कोई स्थायी मरम्मत नहीं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदार और जिम्मेदार नेताओं , इंजीनियर को इस बात की परवाह ही नहीं कि घटिया निर्माण शहर को किस हाल में ले जा रहा है। बिना लेवलिंग, बिना रोलिंग और बिना मापदंडों के किए गए इस डामरीकरण से न सड़कें सुधरेंगी, न समस्या।
अगर आप घंटाघर से मार्केट के अंदर घुसते हैं और बड़ा फव्वारा रोड की ओर बढ़ते हैं, तो वहां भी वही हाल देखने को मिलता है। अंदरूनी सड़कों पर भी केवल ऊपर से डामर चढ़ा दी गई है।, बस उनके ऊपर काली परत डाल दी गई है ताकि दिखावे में मरम्मत पूरी लगे।
दुकानदारों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह सारा काम सिर्फ खानापूर्ति के लिए किया गया है। रोड की मजबूती या टिकाऊपन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पहली ही बारिश में पूरी परत उखड़ने की आशंका है।
हर साल जबलपुर की जनता टैक्स देती है, उम्मीद करती है कि सड़कों की हालत बेहतर होगी। लेकिन बदले में मिलती है घटिया क्वालिटी की सड़कों की सौगात। सवाल यही है कि जिम्मेदार कौन है? और क्या इस पर कोई कार्रवाई होगी?
फिलहाल तो तस्वीरें और जमीनी हालात यही कहते हैं — जब तक जिम्मेदारों को जवाबदेह नहीं बनाया जाएगा, शहर की सड़कों पर यही लीपापोती चलती रहेगी।














