नई दिल्ली। देश में साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इंटरनेट से जुड़े CCTV कैमरों की बिक्री पर अब सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। खासतौर पर वे कैमरे जिनमें विदेशी, विशेषकर चीनी कंपोनेंट्स या फर्मवेयर इस्तेमाल हो रहे हैं, उन्हें बिना सरकारी मंजूरी के बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले के तहत कंपनियों को अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) से क्लियरेंस लेना अनिवार्य किया गया है।
सरकार का यह कदम सीधे तौर पर उन कंपनियों को प्रभावित कर सकता है जो भारत में बड़े पैमाने पर सर्विलांस उपकरण सप्लाई करती हैं, जिनमें Hikvision, Dahua Technology और TP-Link जैसे नाम शामिल हैं। यदि ये कंपनियां नए नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उनके प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का असर पहले से लगे CCTV कैमरों पर नहीं पड़ेगा। यानी आम लोगों और संस्थानों को घबराने की जरूरत नहीं है, उनके मौजूदा सिस्टम पहले की तरह काम करते रहेंगे। यह नियम केवल नए प्रोडक्ट्स की बिक्री और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर लागू होगा।
इस निर्णय के पीछे सरकार की प्राथमिकता देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना और डेटा लीक जैसी संभावित खतरों को रोकना है। पिछले कुछ समय में यह आशंका जताई जाती रही है कि कुछ विदेशी उपकरण यूजर्स का डेटा बाहर भेज सकते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मुद्दा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती देगा और घरेलू कंपनियों को CCTV और सर्विलांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। आने वाले समय में बाजार में केवल वही CCTV कैमरे उपलब्ध होंगे जो भारत सरकार के सुरक्षा मानकों पर खरे उतरेंगे। सरकार ने CCTV कैमरों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि सुरक्षा मानकों को सख्त किया है। उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन भविष्य में नया कैमरा खरीदते समय सरकारी मंजूरी का ध्यान रखना जरूरी होगा।











