महिला सुरक्षा पर गोष्ठी: चुनौतियां, समाधान और समाज की भूमिका

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जयपुर, राजस्थान विश्वविद्यालय के मानविकी पीठ सभागार में “महिला सुरक्षा-चुनौतियां एवं समाधान” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने महिला सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी का आयोजन समर्थ सेवा न्यास, मनसा और डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग द्वारा किया गया था।

महिलाओं के सशक्तिकरण की आवश्यकता नहीं: बाबूलाल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय महिला को सशक्तीकरण की आवश्यकता नहीं, वह पहले से ही सशक्त है। उन्होंने महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पुरुष महिलाओं को नहीं बनाते बल्कि महिलाएं पुरुषों का निर्माण करती हैं। उन्होंने माताओं की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि माताएं ही अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देकर सभ्य समाज का निर्माण करती हैं।

मीडिया की भूमिका पर जोर: डॉ. शिप्रा माथुर

स्वतंत्र पत्रकार और विचारक डॉ. शिप्रा माथुर ने कहा कि देश में यौन हिंसा के मामलों में वृद्धि हुई है और अपराध की जघन्यता भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि हमें महिलाओं को सक्षम बनाना होगा और मीडिया को भी सिलेक्टिव पत्रकारिता से ऊपर उठकर अपना दायित्व निभाना होगा।

महिला सुरक्षा समाज और संस्कृति से जुड़ा विषय: अनिल पालीवाल

वरिष्ठ आईपीएस और एडीजी रेलवे अनिल पालीवाल ने महिला सुरक्षा के मुद्दे को समाज और संस्कृति से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत मामलों में महिलाएं जिनसे अपराध होता है, वे उनके परिचित होते हैं। उन्होंने महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया।

अजमेर सेक्स स्कैंडल पर चर्चा: मूमल राजवी

अधिवक्ता मूमल राजवी ने अजमेर सेक्स स्कैंडल का उल्लेख करते हुए बताया कि यह कृत्य 250 बालिकाओं के जीवन को प्रभावित कर गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपियों को सजा मिलने में 32 वर्ष लगे, जो हमारे सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है।

महिला सुरक्षा: समाज और राष्ट्र का विषय

समर्थ सेवा न्यास की अध्यक्ष डॉ. मंजु शर्मा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि महिला सुरक्षा का विषय सिर्फ महिलाओं का नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का है। उन्होंने कानून की कमजोरियों और सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।

अन्य वक्ताओं के विचार

पुष्पा यादव, जो अजमेर में 1999 से 2003 के बीच पढ़ाई कर रही थीं, ने उस समय के भयावह माहौल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस दौर में लोग इस मुद्दे पर बात करने से भी डरते थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मां शारदे के भजन से हुआ और समापन शांति मंत्र से किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र कार्यवाह गेंदालाल, डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग के निदेशक डॉ. जय सिंह सहित कई महिलाएं और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

गोष्ठी में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया गया। वक्ताओं ने महिलाओं को सशक्त बनाने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया।

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